डेढ़ साल में एमपी पुलिस पर हमले की 461 घटनाएं:612 पुलिसकर्मी घायल, पांच की मौत, गृह मंत्रालय के आंकड़ों में सामने आया सच

मध्यप्रदेश में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने वाली पुलिस खुद गंभीर संकट में दिखाई दे रही है। एक ओर पुलिसकर्मियों पर हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, तो दूसरी ओर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के खिलाफ ही आपराधिक प्रकरण दर्ज हो रहे हैं। विधानसभा में पूछे गए सवालों और सरकारी जवाबों के आधार पर सामने आए आंकड़े बताते हैं कि राज्य में पुलिस “डिफेंसिव मोड” में पहुंच चुकी है। पुलिस पर 461 हमले, 5 की मौत
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1 जनवरी 2024 से 30 जून 2025 के बीच प्रदेश में पुलिसकर्मियों पर हमले के 461 मामले दर्ज हुए। इन घटनाओं में 612 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि 5 पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है। हालिया उदाहरणों में उज्जैन में ASI की गोली मारकर हत्या और ग्वालियर-चंबल अंचल में पुलिस पर भीड़ के हमले शामिल हैं। ये घटनाएं बताती हैं कि अपराधियों और असामाजिक तत्वों का पुलिस का खौफ लगातार कम हुआ है। 329 पुलिसकर्मियों पर खुद दर्ज हुए आपराधिक केस सिवनी हवाला कांड में अफसर से लेकर पूरा थाना जेल गया
सिवनी जिले के हवाला कांड में स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि एसडीओपी, टीआई और एसआई सहित लगभग पूरा थाना जेल पहुंच गया। यह प्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ, जब एक साथ पूरे थाने के अधिकारी-कर्मचारी जेल भेजे गए। इस घटना ने पुलिस तंत्र की आंतरिक अनुशासन व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। पुलिस कमिश्नरी सिस्टम के बाद अपराध बढ़े इंदौर-भोपाल में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद चोरी, लूट, वाहन चोरी, महिलाओं पर अत्याचार और हत्या जैसे मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विपक्ष का आरोप है कि शक्तियों के केंद्रीकरण के बावजूद जमीनी स्तर पर पुलिसिंग कमजोर हुई है। अपराध और अवैध गतिविधियों का बढ़ता दबाव
प्रदेश में अवैध शराब, अवैध खनन, जुआ-सट्टा और ड्रग्स के मामलों में निरंतर वृद्धि हो रही है। राजधानी भोपाल में ड्रग्स की फैक्ट्री और अन्य राज्यों तक सप्लाई के खुलासे के बावजूद पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे हैं। वहीं साइबर अपराधों में भी विस्फोटक बढ़ोतरी हुई है—2024 में 68 हजार से अधिक साइबर अपराध, और 30 जून 2025 तक करीब 34 हजार नए मामले दर्ज किए गए। मध्यप्रदेश में पुलिसकर्मियों पर हमलों और गंभीर आपराधिक घटनाओं को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। यह जानकारी विधानसभा में पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस विधायक बाला बच्चन के सवाल के जवाब में बीते 05 अगस्त को दी गई। विधायक ने प्रदेश में पुलिसकर्मियों पर हमलों और इंदौर संभाग में अपराधों की स्थिति पर सरकार से जवाब मांगा था पुलिसकर्मियों पर हमलों के आंकड़े
गृह विभाग की जानकारी के अनुसार 1 जनवरी 2024 से 30 जून 2025 की अवधि में प्रदेशभर में— पुलिसकर्मियों पर हमले के 461 मामले दर्ज हुए। इन हमलों में 612 पुलिसकर्मी घायल हुए और 5 पुलिसकर्मियों की मौत हुई। इंदौर संभाग में अपराधों की स्थिति
गृह मंत्रालय के मुताबिक 9 दिसंबर 2021 को इंदौर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू किया गया। इसके बाद 9 दिसंबर 2021 से 12 जुलाई 2025 तक इंदौर संभाग में अपराधों के आंकड़े इस प्रकार रहे…

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