रेलवे पार्सल नियमों में बदलाव से छोटे व्यापारियों-किसानों को राहत:नेट टर्नओवर की शर्त खत्म, शॉर्ट टर्म लीज़ से सस्ता व तेज़ पार्सल परिवहन

रेलवे पार्सल परिवहन को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई बड़े बदलाव कर रहा है। इसमें ऑनलाइन पार्सल बुकिंग के लिए मोबाइल ऐप, डबल डेकर जैसी ट्रेनों के कोचों में पार्सल बुकिंग की सुविधा, 130 किमी प्रतिघंटा की स्पीड वाली विशेष पार्सल EMU ट्रेन और डोर-टू-डोर पार्सल डिलीवरी सेवा शामिल हैं। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशिकिरण के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में पार्सल नियमों में किए गए बदलाव के अच्छे नतीजे देखने के बाद अब इन्हें पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क पर लागू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुंबई-कोलकाता रूट पर फर्स्ट माइल-लास्ट माइल सेवा शुरू कर दी गई है, जिसे चरणबद्ध तरीके से अन्य बड़े शहरों तक बढ़ाया जाएगा। हैदराबाद में शुरू डोर-टू-डोर पार्सल डिलीवरी सेवा को भी अब अन्य शहरों तक ले जाने की तैयारी है और पार्सल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कॉनकोर को भी इस नेटवर्क से जोड़ा गया है। नियमों में बड़े सुधार: किसको क्या फायदा रेलवे ने पार्सल से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों में ढील और सरलीकरण किया है, जिससे खास तौर पर छोटे कारोबारी और नए लॉजिस्टिक प्लेयर सिस्टम में आसानी से शामिल हो सकेंगे। जॉइंट पार्सल प्रोडक्ट के तहत रैपिड कार्गो सर्विस शुरू की गई है, जिससे पार्सल तेज़ी से गंतव्य तक पहुंच सकेगा। लॉजिस्टिक्स/ट्रांसपोर्ट बिज़नेस में अब 50 लाख रुपए नेट टर्नओवर की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है, जिससे छोटे और नए उद्यमी भी रेलवे के पार्सल नेटवर्क से सीधे जुड़ सकेंगे। एग्रीगेटर बनने के लिए शुल्क को 20 हजार रुपए + GST से घटाकर 10 हजार रुपए + GST कर दिया गया है, जिससे एग्रीगेटर मॉडल में एंट्री कॉस्ट कम हो जाएगी। पार्सल कार्गो एक्सप्रेस ट्रेन लीज़िंग पॉलिसी में भी बदलाव करते हुए टेंडर में भाग लेने के लिए 10 करोड़ रुपए नेट टर्नओवर की शर्त हटा दी गई है। इसके साथ ही VP और SLR की ई-नीलामी में भी टर्नओवर से जुड़ी शर्तों को समाप्त किया गया है, जिससे अधिक खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा में आ सकेंगे। लीज़ में लचीलापन और सस्ती ढुलाई SLR स्पेस लीज़ प्रक्रिया को लचीला बनाते हुए अब SLR, पार्सल वैन या कंपार्टमेंट की लीज़ 10 से 90 दिनों की अवधि के लिए ली जा सकेगी। मांग के अनुसार शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों तरह के लीज़ विकल्प उपलब्ध रहेंगे, जिससे सीजनल कारोबारी और क्षेत्रीय लॉजिस्टिक कंपनियों को ज्यादा सुविधा मिलेगी। रेलवे ने खाली दिशा में माल ढुलाई को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष रियायत दी है। जिन दिशाओं में पार्सल सामान्य तौर पर खाली जाते थे, वहां रियायती दरों पर लोडिंग की सुविधा दी जाएगी। इससे एक तरफ खाली रेक की बर्बादी रुकेगी, दूसरी तरफ कारोबारियों को कम खर्च में दूरस्थ बाजारों तक पहुंचने का मौका मिलेगा। किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए नए मौके इन सभी सुधारों से रेलवे के माध्यम से पार्सल परिवहन को अधिक सरल, तेज़ और किफायती बनाने का प्रयास किया जा रहा है। छोटे व्यापारियों और किसानों को अपने उत्पादों-जैसे कृषि उपज, प्रोसेस्ड फूड, हैंडीक्राफ्ट और अन्य सामान-देशभर के बाजारों तक पहुंचाने के लिए सस्ती और भरोसेमंद विकल्प मिल सकेगा। लॉजिस्टिक सेक्टर में नए खिलाड़ियों की भागीदारी से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे ग्राहक को बेहतर सेवा और रेट मिल पाने की संभावना भी मजबूत होगी।

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