न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के एनएसआईकॉन-2025 के चौथे दिन ‘ब्रेन और स्पाइन देखभाल में चुनौतियों पर विजय’ थीम पर वैज्ञानिक विमर्श हुआ। शनिवार को 200 से अधिक शोध पत्रों पर चर्चा हुई। स्कल बेस सर्जरी, ब्रेन इंजरी, ट्रॉमा मैनेजमेंट, पोस्ट सर्जरी केयर और न्यूरोसर्जरी वेलनेस जैसे विषयों पर सत्र हुए। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि ब्रेन ट्रांसप्लांट फिलहाल संभव नहीं है, लेकिन एआई, ब्रेन मशीन इंटरफेस और ब्रेन स्पाइनल इंटरफेस तकनीकें लकवाग्रस्त मरीजों के लिए नई उम्मीद जगा रही हैं।
दोपहर सत्र में कारगिल युद्ध के नायक जनरल वी.पी. मलिक ने कहा कि जज्बा और जीत का जुनून ही विजय की बुनियाद है। डॉ. आई.एन. वाजपेयी ने शोध को भविष्य की न्यूरोसर्जरी की दिशा बदलने वाला बताया। अमेरिका से आए डॉ. केनन आर्टानोविक ने भारतीय न्यूरोसर्जनों के काम की सराहना की। डॉ. अभिधा शाह ने कहा कि न्यूरोसर्जरी में महिलाएं भी नेतृत्व कर रही हैं, जबकि डॉ. अतुल गोयल ने भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बताया।


