जालोर में जातिगत आंदोलन का विरोध, जिला स्तरीय अधिवेशन हुआ:आयोजक बोले- समता आंदोलन हर वंचित व्यक्ति के साथ खड़ा है

जालोर में सामतीपुरा रोड पर एक निजी रिसोर्ट में समता आन्दोलन समिति के द्वारा जातिगत आंदोलन के विरोध में जिला स्तरीय अधिवेशन का आयोजन किया गया। इसके साथ समिति के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता कर जातिगत आन्दोलन समाप्त करने की मांग की। समता आन्दोलन का जिला स्तरीय अधिवेशन रविवार को जालोर मुख्यालय पर सम्पन्न हुआ। अधिवेशन में राष्ट्रीय, राज्य एवं संभाग स्तर के पदाधिकारियों ने सहभागिता करते हुए सामाजिक समरसता, समान अवसर और न्यायपूर्ण व्यवस्था पर अपने विचार रखे। अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष पाराशर नारायण शर्मा ने कहा कि समता आन्दोलन एक समतावादी, राष्ट्रवादी एवं गैर-राजनीतिक आन्दोलन है, जो समाज से सभी प्रकार की बुराइयों को समाप्त कर एक सशक्त एवं समरस राष्ट्र के निर्माण के लिए सतत संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि आन्दोलन प्रत्येक वंचित और जरूरतमंद व्यक्ति के साथ खड़ा है। शर्मा ने स्पष्ट किया कि समता आन्दोलन जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था के विरुद्ध है, क्योंकि इससे समाज में जातिगत वैमनस्य बढ़ रहा है और आरक्षण का वास्तविक लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने कहा कि आन्दोलन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए निर्धारित पांचों मानदंडों का पूर्ण समर्थन करता है और इन्हीं मानदंडों को ओबीसी वर्ग में भी लागू करवाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का उल्लेख करते हुए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग में क्रीमीलेयर प्रावधान एवं उपवर्गीकरण लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि आरक्षण का लाभ वास्तविक वंचित वर्ग तक सीमित रह सके। साथ ही पदोन्नति में जातिगत आरक्षण को समाप्त करने की मांग को न्यायोचित बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की पालना में यह व्यवस्था पहले ही समाप्त की जा चुकी है। एट्रोसिटी एक्ट को लेकर फैली भ्रांतियों पर बोलते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि यह धारणा गलत है कि एफआईआर दर्ज होते ही गिरफ्तारी अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार प्रकरण के निर्देशों के अनुसार सात वर्ष तक की सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है और फर्जी मामलों में अग्रिम जमानत अनिवार्य है। उन्होंने आमजन से अपील की कि ऐसे मामलों में भयभीत न हों और किसी भी दबाव, समझौते या रिश्वत से बचते हुए समता आन्दोलन के पदाधिकारियों से संपर्क करें। उन्होंने विधायिका में जातिगत आरक्षण का भी विरोध करते हुए कहा कि इससे देश में जातिगत राजनीति को बढ़ावा मिल रहा है और विकासवादी सोच कमजोर हो रही है। पंचायतों एवं नगरीय निकायों में ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आरक्षण संख्यात्मक आंकड़ों के आधार पर ही दिया जाना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने राजस्थान के वैश्य समाज से जुड़े संगठनों से विधिसम्मत तरीके से अपनी मांग रखने का आह्वान किया। अधिवेशन में राष्ट्रीय सलाहकार योगेन्द्र राठौड़, जयपुर संभाग अध्यक्ष ऋषिराज राठौर, जोधपुर संभाग अध्यक्ष कैलाश राजपुरोहित एवं शिक्षा सेवा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल विजयवर्गीय ने भी अपने विचार रखे। अधिवेशन के समापन पर जालोर जिला अध्यक्ष गणपत सिंह चौहान परावा ने अधिवेशन संयोजक चंदन सिंह चंपावत, कार्यकारिणी सदस्यों, विभिन्न ब्लॉक व मंडल अध्यक्षों तथा उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।

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