भारत को विश्व गुरु बनाने प्रत्येक नागरिक को सामर्थ्य अनुसार योगदान देना होगा: नरेश

भास्कर न्यूज | मुंगेली ग्राम बोदा में सामाजिक सद्भाव, समरसता, ग्राम विकास व पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को एकता के सूत्र में पिरोना, जातीय भेदभाव को समाप्त करना, सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति व्यापक जन-जागरूकता लाना रहा। सम्मेलन को संतों और प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया, जिन्होंने एकता और राष्ट्रीय कर्तव्य की भावना को बल दिया। संत राधा मोहन दास पुजारी (राधा-कृष्ण मंदिर, गंडई) ने हिंदुत्व के वास्तविक अर्थ को सामाजिक व राष्ट्रीय एकता का आधार बताया और सभी प्रकार के जातीय भेदभाव को तुरंत समाप्त करने व संगठित होकर रहने का पुरजोर आह्वान किया। संत श्री गया प्रसाद व्यास (रासधारी भागवताचार्य) ने वैदिक मंत्रों के उदाहरणों का सार प्रस्तुत करते हुए भारत को पुनः श्रेष्ठ व आदर्श राष्ट्र बनाने के लिए समाज और व्यक्ति के जीवन में उच्च मानकों को अपनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। मुख्य वक्ता नरेश अग्रवाल (सामाजिक कार्यकर्ता) ने कहा कि, भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपने सामर्थ्य अनुसार योगदान देना होगा, चाहे वह गिलहरी जैसा छोटा ही क्यों न हो। मनोहर यादव ने सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण पर अपने विचार रखे। इस दौरान कलेश्वर साहू, हीरा कश्यप, कन्हैया बैस, हजारी साहू, फागू धृतलहरे, मुकेश साहू, देवेंद्र उपाध्याय, भवानी साहू, रामपूजन सिंह, शिवशरण सिंह, गोविंद बंजारे, विनय दुबे, चंद्रकुमार साहू, रामा साहू, शिवकुमार उपाध्याय, ओमप्रकाश साहू, टोपीलाल साहू, देवेंद्र परिहार, वीरभद्र परिहार, रोहित सागर, सुकलाल साहू, परमेश्वर उपाध्याय, मणिराम बंजारे, भरत बंजारे, धर्मेंद्र धृतलहरे, आदित्य मौजूद रहे। आकाश परिहार ने हिंदुत्व को धार्मिक संकीर्णता से ऊपर उठाकर राष्ट्रीयता व भारतीयता के भाव के रूप में समझाया और संत गुरु घासीदास के मनखे-मनखे एक समान के संदेश के माध्यम से समाज की अटूट एकता पर जोर दिया। जनपद सदस्य लालाराम साहू ने रामचरित मानस के उद्धरणों का प्रयोग करते हुए समरसता का प्रभावी संदेश दिया। जिला पंचायत सदस्य रजनी माणिक सोनवानी ने ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य, सामाजिक समरसता, स्व-बोध व परिवार प्रबोधन के 5 कर्तव्यों के निर्वहन पर विशेष बल दिया। मानिक सोनवानी व संजय सिंह परिहार ने भी रामचरित मानस के उद्धरणों और अपने विचारों के माध्यम से सामाजिक समरसता व बंधुत्व की भावना को सुदृढ़ किया। सम्मेलन का समापन सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता, पर्यावरण संरक्षण एवं राष्ट्र निर्माण के सामूहिक और दृढ़ संकल्प के साथ हुआ। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां सम्मेलन की शुरुआत मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसने दर्शकों को एकता और भक्ति के रंग में रंग दिया। संस्कार विद्यापीठ के बच्चों ने सामाजिक समरसता गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। बहरपुर की सतनाम फूल पंथी पार्टी द्वारा ओजपूर्ण पंथी नृत्य की प्रस्तुति दी गई। रात्रि में होल्हा पारा पार्टी द्वारा रंगारंग भजन व पंथी नृत्य, श्रीराम कीर्तन सिपाही पार्टी और परसवारा पार्टी द्वारा श्रीराम कीर्तन व मातारानी जसगीत की प्रस्तुति ने समां बांध दिया। कार्यक्रम का समापन गांव के सभी लोगों द्वारा भारत माता की आरती के साथ आभार व्यक्त करते हुए किया गया।

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