डिजिटल अरेस्ट के बहाने साइबर फ्रॉड का प्रयास, पुलिस की मदद से बची मोटी रकम

भास्कर संवाददाता | रायसेन डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का गंभीर मामला सामने आया है, लेकिन समय रहते सतर्कता बरते जाने से बड़ा नुकसान टल गया। देवनगर पुलिस के अनुसार बेहरा गांव निवासी पुरुषोत्तम पिता दिनेश आदिवासी 40 साल को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। कॉलर ने खुद को पुलिस से जुड़ा बताते हुए कहा कि पुरुषोत्तम का नाम एक केस में है और उसे वीडियो कॉल के जरिए “डिजिटल अरेस्ट” किया जा रहा है। आरोपी ने डराते हुए तुरंत मोटी रकम ट्रांसफर न करने पर गिरफ्तारी की धमकी दी थी। घबराए पीड़ित ने पैसे ट्रांसफर करने से पहले अपने मित्र एवं जनपद सदस्य प्रतिनिधि दीपक धाकड़ से संपर्क किया। मामले की गंभीरता समझते हुए दीपक धाकड़ ने तत्काल थाना प्रभारी देवनगर हरिओम अस्ताया से बात कराई। थाना प्रभारी ने पीड़ित को स्पष्ट किया कि यह साइबर फ्रॉड है, पुलिस कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती, ओटीपी साझा न करें, अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें और पीड़ित के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं है। समय पर समझाइश और सक्रियता से एक निर्दोष व्यक्ति की मेहनत की कमाई बच गई। बैंकिंग जानकारी शेयर न करें साइबर ठगों से सतर्क रहें, UPI/बैंक/OTP व व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और डराने-धमकाने वाली कॉल आने पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। पुलिस कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है।

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