बुरहानपुर में ताप्ती नदी में अवैध रेत खनन पर रोक लगाने की मांग को लेकर ताप्ती सेवा समिति ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। सोमवार को अपर कलेक्टर वीर सिंह चौहान को कलेक्टर के नाम यह ज्ञापन दिया गया। समिति ने ज्ञापन में बताया कि अवैध रेत खनन से ताप्ती नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे भूजल स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, कृषि और सिंचाई पर पड़ रहा है। नेपानगर, खकनार, असीरगढ़ बेल्ट और ताप्ती किनारे के कई गांवों में कुएं, हैंडपंप और बोरवेल सूखने की स्थिति में हैं। पुल, तटबंध, सड़कें कमजोर हो रही
समिति ने यह भी चिंता जताई कि रेत खनन से नदी के पुल, तटबंध और किनारे की सड़कें कमजोर हो रही हैं, जिससे भविष्य में बड़े हादसों का खतरा बढ़ गया है। इसके अतिरिक्त, जलजीवों के प्रजनन क्षेत्र नष्ट हो रहे हैं और ताप्ती नदी की जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंच रहा है। रेत हटने से नदी का पानी गादयुक्त और दूषित हो रहा है, जिसका असर शहरी और ग्रामीण जल आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। ताप्ती सेवा समिति ने प्रशासन से कई मांगें की हैं। इनमें नदी के संवेदनशील घाटों को ‘रेड जोन’ घोषित कर मशीन आधारित खनन पर तत्काल रोक लगाना प्रमुख है। समिति ने रात में ड्रोन निगरानी बढ़ाने, अवैध खनन में लगे वाहनों की जब्ती, एक विशेष निगरानी दल के गठन और संबंधित विभागों की संयुक्त कार्रवाई की भी मांग की। इसके अतिरिक्त, समिति ने अधिकृत खनन स्थलों की जानकारी सार्वजनिक करने और स्थानीय ग्रामीणों व सामाजिक संगठनों को नदी संरक्षण से जोड़ने का आग्रह किया। इस अवसर पर समिति की अध्यक्ष सरिता भगत, सचिव धर्मेंद्र सोनी, अभय बालापुरकर, अनिल मिश्रा, बलराम सुखदाने, राम अग्रवाल, अता उल्लाह खान, मंसूर सेवक और बसंत पाल सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे। ताप्ती सेवा समिति ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध रेत खनन पर शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो ताप्ती नदी का संकट और गहरा व अपूरणीय हो सकता है।


