रंगों, भावनाओं और संवेदनाओं से सजी बच्चों की कल्पनाशील दुनिया ने होटल आईटीसी राजपूताना में कला प्रेमियों का दिल जीत लिया। जयश्री पेड़ीवाल इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों की ओर से आयोजित छठी कलात्मक प्रदर्शनी ‘आर्ट विद ए हार्ट’ की सोमवार से शुरुआत हुई। प्रदर्शनी का उद्घाटन राजस्थान पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने किया। यह प्रदर्शनी 18 दिसंबर तक आमजन के लिए खुली रहेगी। इस अनूठी प्रदर्शनी में बच्चों की रचनात्मक सोच और सामाजिक सरोकारों की झलक साफ नजर आती है। करीब 500 से अधिक कलाकृतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपने मन की भावनाओं, सपनों और जीवन के अनुभवों को रंगों व आकारों में ढाला है। छोटी उम्र में इतनी परिपक्व अभिव्यक्ति ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया। उद्घाटन अवसर पर डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने बच्चों की कला की सराहना करते हुए कहा कि आज के तकनीकी दौर में कला हमें संवेदनशील बनाती है और सोचने की दिशा देती है। बच्चों द्वारा बनाई गई ये कृतियां न सिर्फ सौंदर्य का अनुभव कराती हैं, बल्कि समाज को समझने और महसूस करने की शक्ति भी देती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सृजनशीलता, ईमानदारी और दयालुता के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। वेलकम आर्ट गैलरी के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्देश्य कला के माध्यम से सामाजिक जागरूकता फैलाना है। प्रदर्शनी में तेल व एक्रेलिक पेंटिंग्स, इंस्टॉलेशन और मूर्तियां शामिल हैं, जिनमें जीवंत पोर्ट्रेट्स के साथ संगीत, संस्कृति, उत्सव और जीवन के विविध रंगों को प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया है। जयश्री पेड़ीवाल विद्यालय समूह की निदेशिका डॉ. जयश्री पेड़ीवाल ने कहा कि बच्चों की रचनात्मकता ही भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है। ऐसी प्रदर्शनियां छात्रों को अपनी कला को पहचान देने के साथ-साथ समाज से जोड़ने का अवसर देती हैं। उन्होंने कहा कि आज के युवा कलाकार ही आने वाली पीढ़ी के दा विंची और पिकासो बन सकते हैं। इस प्रदर्शनी को देखने के लिए जयपुर के 40 से अधिक स्कूलों ने रुचि दिखाई। उद्यमी, अभिभावक, विद्यार्थी और कला प्रेमी बच्चों की कृतियों को देखकर मंत्रमुग्ध नजर आए। छात्र कलाकार स्वयं अपनी कलाकृतियों की व्याख्या करते हुए दर्शकों को कला की गहराइयों से रूबरू करा रहे हैं। खास बात यह है कि प्रदर्शनी में बेची जाने वाली सभी कलाकृतियों से प्राप्त राशि समाज सेवा के लिए दान की जाएगी। ‘आर्ट विद ए हार्ट’ केवल एक कला प्रदर्शनी नहीं, बल्कि बच्चों की संवेदनशील सोच और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में एक प्रेरक पहल बनकर उभरी है।


