विजय दिवस के मौके पर मंगलवार को साउथ वेस्टर्न कमांड की साइकिल रैली का समापन सप्त शक्ति कमांड परिसर जयपुर में हुआ। यह रैली सेना दिवस कार्यक्रमों की श्रृंखला की शुरुआत के तौर पर आयोजित की गई थी, जिसका फ्लैगऑफ 9 दिसंबर को पंजाब के आसफवाला वॉर मेमोरियल, फाजिल्का से किया गया था। करीब 800 किलोमीटर से ज्यादा लंबे इस रूट पर 23 सैनिकों ने फाजिल्का, अबोहर, श्रीगंगानगर, करणपुर, अनूपगढ़, खाजूवाला और बीकानेर जैसे इलाकों से गुजरते हुए 16 दिसंबर को जयपुर पहुंचकर यात्रा पूरी की। इस रैली में दो ऑफिसर, चार जेसीओ और 16 जवान शामिल रहे। पंजाब और राजस्थान के करीब 60 जिलों से होकर गुजरने वाली इस साइकिल यात्रा के जरिए सीमावर्ती इलाकों से लेकर शहरों तक सेना और आम लोगों के बीच संवाद को मजबूत करने पर फोकस रखा गया। सेना और जनता के रिश्तों को मजबूत करने का संदेश समापन समारोह में सप्त शक्ति कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टीनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने बताया कि यह साइकिल रैली सिर्फ एक औपचारिक समापन कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसी यात्रा का प्रतीक है, जो देश की एकता और जनसंपर्क की भावना को आगे बढ़ाती है। उन्होंने बताया कि रैली का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों का समर्थन, सेना के प्रति विश्वास और संरक्षण की भावना को मजबूत करना रहा। उन्होंने बताया कि इस दौरान लोगों से यह भी जानने की कोशिश की गई कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को नागरिक किस नजर से देखते हैं। इसके साथ ही पूर्व सैनिकों के योगदान को याद करना, उनका सम्मान करना और स्थानीय युवाओं को डिसिप्लिन, फिटनेस और राष्ट्रीय सेवा की ओर प्रेरित करना भी रैली के अहम उद्देश्य रहे। जयपुर में होने वाली सेना दिवस परेड की जानकारी भी इस रैली के जरिए लोगों तक पहुंचाई गई। विजय दिवस और 1971 की ऐतिहासिक जीत का स्मरण लेफ्टीनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने विजय दिवस के महत्व पर बात करते हुए बताया कि आज से 54 साल पहले 16 दिसंबर 1971 को भारत ने एक ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। उस दिन पाकिस्तान के दो हिस्सों में बंटने के साथ पूर्वी पाकिस्तान को आज़ादी मिली और बांग्लादेश एक नए देश के रूप में उभरा। उन्होंने बताया कि यह जीत द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी और सबसे स्ट्रैटेजिक विक्ट्री मानी जाती है, जिसका श्रेय भारतीय सेना और पूर्व सैनिकों को जाता है। इस साइकिल रैली के जरिए उसी ऐतिहासिक यात्रा और बलिदान को भी याद किया गया। ऑपरेशन सिंदूर का संदेश गांव-गांव तक रैली के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता केवल भारतीय सेना की ताकत नहीं, बल्कि पूरे देश की एकजुटता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि भारत एक शांतिप्रिय देश है, लेकिन अपने नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। ऑपरेशन सिंदूर को उन्होंने भारत की राष्ट्रीय इच्छा शक्ति और 2047 के विकसित भारत के संकल्प से जोड़ते हुए बताया कि इस ऑपरेशन के जरिए दुनिया को कई अहम संदेश दिए गए, जिन्हें साइकिल रैली के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंचाया गया। साइकिलिस्टों ने साझा किए अनुभव इंटरनेशनल साइक्लिस्ट रोहित शर्मा ने बताया कि फाजिल्का से जयपुर तक की इस 800 किलोमीटर की रैली का मकसद बॉर्डर एरिया के गांवों और शहरों में जाकर सेना और सिविलियन के बीच इंगेजमेंट बढ़ाना रहा। उन्होंने बताया कि रैली के दौरान ऑपरेशन सिंदूर के बारे में लोगों को बताया गया और यह समझाया गया कि किस तरह सेना उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है। प्रसिद्ध साइकिलिस्ट आशा मालवीय ने बताया कि रैली के दौरान वे कई गांवों में गए, बच्चों और पूर्व सैनिकों से मिले और ऑपरेशन सिंदूर का संदेश लोगों तक पहुंचाया। उन्होंने बताया कि इस यात्रा ने जमीनी स्तर पर सेना और समाज के रिश्तों को और मजबूत किया। करीब एक हफ्ते तक चली यह साइकिल रैली आखिरकार विजय दिवस के दिन जयपुर पहुंचकर खत्म हुई, जहां इसे सेना की एकता, अनुशासन और जनता के साथ गहरे जुड़ाव के प्रतीक के रूप में देखा गया।


