बीकानेर प्राधिकरण बनने के बाद अब शहर का ट्रैफिक सिस्टम मजबूत होगा। इसको लेकर एक फर्म को दायित्व सौंपा गया है। फर्म 85 लाख रुपए के खर्चे में 9 महीने में प्लान तैयार करके नगर निगम को सौंपेगी। उसके बाद निगम उसके आधार पर ही शहर की सड़क, चौराहे और कैसे कारगर बनें ट्रैफिक कंट्रोल लाइट। दरअसल एक दिन पहले वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की केन्द्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) शाखा के चीफ साइंटिस्ट बीकानेर आए थे। उन्हें नगर निगम ने बुलाया था। उनसे कलेक्टर, निगम आयुक्त, डीटीओ और बीडीए सचिव समेत तमाम अधिकारियों ने चर्चा की। उनसे बीकानेर शहर और उसके आउटर का एक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम विकसित करने के लिए कहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि शहर की आबादी अब 10 लाख के करीब पहुंच रही है। हर साल वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। शहर का विस्तार भी हो रहा है लेकिन सड़क, चौराहों की स्थिति पुरानी है। यानी पांच लाख की आबादी के हिसाब से ही अभी शहर की सड़क, चौराहे हैं। सीएसआईआर के वैज्ञानिक ने प्रजेंटेशन दिया कि ये सिस्टम 2050 तक की स्थिति को देखते हुए विकसित करना होगा। उसके लिए उन्हें बीकानेर में कितने दो पहिया, चार पहिया, बसें, रोडवेज, रेलवे की स्थिति, क्रॉसिंग, कितने चौराहे हैं, सड़कें कितनी चौड़ी हैं। इन सबके डाटा मुहैया कराने को कलेक्टर ने कहा है। सभी विभागों से जिस भी डाटा की जरूरत संबंधित साइंटिस्ट को होगी वो विभाग मुहैया कराए। नगर निगम इसकी फंडिंग एजेंसी है। इस सर्वे में करीब 85 लाख रुपए का खर्चा आएगा। खबर है कि 7 से 9 महीने में संबंधित फर्म डीपीआर बनाएगी। डीपीआर में कहां आरओबी बनने हैं, कहां अंडर पास, कहां पार्किंग, कहां क्या होना चाहिए उस सब का डिटेल तैयार होगा। 9 महीने में सिर्फ खाका तैयार होगा, उसके बाद असली काम; तो जयपुर की तर्ज पर विकसित होगा शहर जिस प्लान पर जिला प्रशासन काम कर रहा है। जलभराव हो या ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान। अगर ये फलीभूत हुआ तो आने वाले 5 सालों में शहर जयपुर-जोधपुर की तर्ज पर विकसित होगा। जयपुर-जोधपुर जैसे शहरों में ट्रैफिक सिस्टम और कंट्रोल बेहतर है। वहां कोई आसानी से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन नहीं करता। साथ ही लोगों के लिए सुविधाएं हैं। पैदल के लिए फुटपॉथ है। पार्किंग है। सड़कें चौड़ी हैं। जो प्रोजेक्ट तैयार कराया जा रहा है उसका मकसद उसी दिशा में आगे बढ़ना है। ये एक सोच है। आने वाले समय में इसके लिए बजट चाहिए जो अगर सहज उपलब्ध हो गया तो शहर का विकास तेजी से संभव है। फिलहाल तो कैसा मैनेजमेंट हो इसकी पूरी डिटेल रिपोर्ट आठ महीने बाद आएगी। असली काम तो उसके बाद शुरू होगा। क्योंकि कमेटी ने सुझा दिया कि जो सड़क अभी 60 फीट चौड़ी है उसे 100 फीट करना होगा। ये काम नगर निगम, बीडीए और पीडब्ल्यूडी को करना होगा। चौराहों को चौड़ीकरण के साथ सौंदर्यीकरण, फुटपाथ, आरओबी, आरयूबी, चौराहों पर लाइटिंग, कितनी रेड, कितनी ग्रीन और कितनी येलो लाइटिंग होगी। चौराहों पर कंट्रोल कितना होगा। उसके लिए ट्रैफिक पुलिस की नफरी कितनी होगी। क्या क्या इंतजाम चाहिए। इस पर काम होगा।


