प्रदेश में करीब 20 हजार खान संचालकों को खनन के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति देने के साथ आने वाले समय में दो हजार नए क्वारी लाइसेंस जारी किए जाएंगे। इसके लिए भूखंडों की नीलामी की जाएगी। खनिज विभाग ने सभी जिलों में इसकी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। दो हजार माइंस की नीलामी होने से पचास हजार से एक लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। साथ ही खान विभाग को भी अच्छा राजस्व मिलेगा। ये सभी माइंस पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल तक की है। इनमें सबसे ज्यादा चित्तौड़गढ़ में 300 माइंस की नीलामी होगी। इसके बाद जोधपुर व बालेसर में 150–150 खानों की नीलामी की जाएगी। इनमें अधिकतर वे खानें हैं, जहां बरसों से खनन नहीं हो रहा। ऐसे में खान विभाग ने यहां नए सिरे से नीलामी करने का निर्णय लिया है। गत वर्ष प्रदेश की 20 हजार खानों की पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं होने का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था। कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश में चार राज्य स्तरीय कमेटियां गठित की गई थी। जयपुर, उदयपुर व जोधपुर से ये कमेटियां ईसी जारी कर रही हैं। सभी खानधारकों को 31 मार्च 2025 तक राज्य स्तरीय समिति से पर्यावरणीय स्वीकृति लेनी है। इसके बाद निरस्त किए गए भूखंडों की ई–नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ईसी के लिए आवेदन नहीं, तब नोटिस जारी किए, संख्या बढ़ेगी खनन कारोबारियों के अनुसार नए भूखंडों की संख्या बढ़ सकती है। फिलहाल 27 जनवरी तक राज्य स्तरीय पर्यावरणीय समितियों के समक्ष ईसी के लिए आवेदन किए जाएंगे। इसमें आवेदन नहीं करने वाले भूखंडों की फिर से बोली लगाई जाएगी। इन्हें पहले नोटिस जारी किए गए थे। बावजूद इसके अगर सभी लोग आवेदन नहीं कर पाते हैं तो इससे यह आंकड़ा भी बढ़ सकता है। वर्तमान में चित्तौड़गढ़ में 300, जोधपुर में 150, बालेसर में 150, बूंदी में 40, नागौर में 50, अजमेर में 25, नीमकाथाना में 10, धौलपुर में 15, जैसलमेर में 11, उदयपुर में 4, पाली और सिरोही में 2–2 खानों सहित कुछ अन्य खनन क्षेत्रों में नीलामी नए वित्तीय वर्ष में प्रस्तावित की जाएगी। इससे अवैध खनन पर भी लगाम लगेगी। कई जगह माफिया अवैध खनन भी कर रहे हैं। निदेशालय की ओर से जिला मुख्यालयों को ऐसे प्लॉट चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं।


