भास्कर संवाददाता | बैतूल राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा रेत खनन और परिवहन पर रोक अथवा नियंत्रण लागू होने के बाद भी जिले में रेत की दरों में अपेक्षित कमी नहीं होने का मुद्दा सामने आया है। डंपर यूनियन एवं रेत सप्लायर्स संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। संगठन का कहना है कि एनजीटी के निर्देशों के पश्चात रेत की दरों में युक्तिसंगत कमी किया जाना आवश्यक था, लेकिन व्यवहार में रेत पूर्ववत अथवा मनमाने उच्च दरों पर ही उपलब्ध कराई जा रही है। इस स्थिति का सीधा और गंभीर प्रभाव बैतूल जिले की आम जनता पर पड़ रहा है। जिससे आम नागरिकों, मध्यमवर्गीय परिवारों, किसानों और छोटे ठेकेदारों को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। संगठन ने इसे खनिज विकास एवं विनियमन अधिनियम 1957, मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 संशोधित तथा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की भावना के विपरीत बताया है। समीपस्थ जिला नर्मदापुरम से वैध रॉयल्टी, ई-ट्रांजिट पास एवं अन्य सभी वैधानिक दस्तावेजों के साथ रेत परिवहन किए जाने पर भी नियमविरुद्ध आपत्तियां की जाती हैं। इससे कृत्रिम कमी उत्पन्न कर रेत की दरों को जानबूझकर ऊंचा रखा जा रहा है। डंपर यूनियन एवं रेत सप्लायर्स संघ ने समीपस्थ जिलों से वैध रेत परिवहन में बाधा न डालने के स्पष्ट निर्देश जारी करने और नियम उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।


