सिंगरौली में कार्बन मोनोऑक्साइड से दो कर्मचारियों की मौत:ठंड से बचने के लिए जलाया था कोयला, कमरे में भरी गैस से दम घुटा

सिंगरौली जिले के बरगवां में स्थित एक ढाबे के दो कर्मचारियों की कार्बन मोनोऑक्साइड गैस से दम घुटने के कारण मौत हो गई। यह घटना बुधवार और गुरुवार की रात के बीच घटित हुई, गुरुवार को शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने हत्या की आशंका को खारिज किया बरगवां इलाके में स्थित केजीएफ फैमिली रेस्टोरेंट में काम करने वाले 16 साल के मिथुन बैग और 18 साल के बबुंदर बैग के शव गुरुवार सुबह ढाबे की पहली मंजिल पर बने कमरे में मिले। पहले होटल संचालक ने हत्या की आशंका जताई थी और पुलिस को सूचना दी। जिसके बाद एसपी मनीष खत्री ने घटनास्थल का निरीक्षण किया था। दम घुटने से हुई दोनों की मौत पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री ने जानकारी दी कि घटनास्थल का निरीक्षण करने पर ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों युवकों की मौत दम घुटने से हुई है। रात में दोनों ने कमरे में कोयले की सिगड़ी जलाकर रखी थी, जिससे निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण उनकी मौत हुई है। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है। एसपी ने समझाया कि कार्बन मोनोऑक्साइड गैस हीमोग्लोबिन से रिएक्शन कर ब्लड सर्कुलेशन को बाधित करती है, जिससे शरीर के अंगों तक रक्त नहीं पहुंच पाता और मृत्यु हो जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि ठंड से बचने के लिए बंद कमरे में कभी भी कोयला जलाकर न सोएं। सिंगरौली में आसानी से मिल जाता है चोरी का कोयला सिंगरौली जिले में 11 से अधिक कोल माइंस हैं, और यहां से कोयला सड़क और ट्रेन के माध्यम से परिवहन किया जाता है। कोयला माफिया खदानों से और परिवहन कर रहे वाहनों से कोयला चुराकर बाजार में बेचते हैं। यहां कोयला सिर्फ एक रुपए प्रति किलो या 50 रुपए प्रति बोरी के हिसाब से बाजार में आसानी से उपलब्ध है। इस कारण लोग लकड़ी या अन्य संसाधनों का उपयोग न करके चोरी के कोयले का खाना पकाने, होटल में या आग तापने के लिए इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि अक्सर इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं। कोयला जलाते वक्त ये सावधानियां बरतें

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