भारत-पाक बॉर्डर पर स्थित कृष्ण का तला गांव में एक ऐसी सड़क बन रही है कि इसको बनाने का कोई औचित्य नहीं हैं। जिस जगह यह सड़क पूरी हो रही हैं, वहां पर भारत-पाक बॉर्डर पर तारबंदी पर बीएसएफ का गेट है। इस पर करीब अस्सी लाख रुपए खर्च होंगे। अस्सी लाख रुपए खर्च करने के बावजूद यह किसी के उपयोग में नहीं आएगी क्योंकि इस रोड से एक भी ढाणी या घर नहीं जुड़ेगा। यहां पर पहले जानू की बावड़ी नाम से गांव था। 1990 में अतिवृष्टि और फिर 1994 में तारबंदी के दौरान गांव को खाली करवा दिया था। यह गांव तारबंदी के बीच आ रहा था। तारबंदी के के दौरान दोनों तरफ आबादी थी। इधर वाले भारत में दूसरी जगह बस गए और उधर के लोग पाकिस्तान चले गए। अब यह जमीन राजस्व रेकार्ड में आबादी भूमि है, लेकिन यहां पर अवैध खेती हो रही है। मुख्यमंत्री राजस्व गांव जोड़ने की योजना के तहत सड़कों के प्रस्ताव मांगे थे, इस पर पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने कृष्ण का तला से अमरपुरा राजस्व गांव जोड़ने के लिए 5 किमी.रोड का प्रस्ताव बनाकर भेज दिया। प्रस्ताव मंजूर हो गया और इस सड़क की अंतिम ढाणी को डामरीकृत सड़क से जोड़ दिया। यह करीब तीन से साढ़े तीन किमी. है। आगे करीब डेढ़ किमी. रोड बनाने को लेकर दो साल से विवाद है। कारण यह है कि आगे न तो कोई ढाणी है और न ही खेत हैं। फिर भी पीडब्ल्यूडी अधिकारी सड़क बनाने पर आमादा हैं। दूसरी तरफ बॉर्डर की अंतिम ढाणी का निवासी लूणाराम इसका विरोध कर रहा है क्योंकि यहां सड़क बनने के बाद लोगों की आवाजाही ज्यादा होगी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी उचित नहीं हैं तथा आगे के कुछ भाग का मुरड़ा कटाण की जगह उसके खेत में कर दिया है। 1.5 किमी. लंबी रोड बनी तो बॉर्डर तारबंदी के गेट तक पहुंचेगी, सुरक्षा को खतरा अभी सड़क तारबंदी से डेढ़ किलोमीटर पीछे तक है। अब यदि आगे पीडब्ल्यूडी सड़क बनाती है तो सामने तारबंदी के गेट पर जाकर पूरी होगी। तारबंदी के पार दो सौ मीटर आगे पाक की चौकी है। यहां पर कोई अवांछित व्यक्ति प्रवेश करता है तो रोड के कारण न तो उसके पद चिन्ह मिलेंगे और न ही सुराग मिल पाएगा। दूसरी तरफ से भारत की बीओपी को जोड़ने के लिए एक सड़क पहले ही बनी हुई है। यह सड़क डेढ़ किमी. में न तो किसी खेत को जोड़ रही है और न ही कोई ढाणी है। भू अभिलेख निरीक्षक मुरारदान के अनुसार पुराना जानू की बावड़ी गांव बाढ़ के दौरान खाली हो गया था, यह बॉर्डर पर है। यह जमीन आबादी भूमि है, यदि यहां कोई काश्त कर रहा है तो 91 की कार्रवाई करके उसको बेदखल किया जाएगा। सीधी बात – अनिल मीणा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी भास्कर: अमरपुरा राजस्व गांव को जोड़ने वाली सड़क पर क्या विवाद है?
एक्सईएन: तीन से साढ़े तीन किमी. सड़क बन गई है। आगे बॉर्डर के पास एक खेत को जोड़ने के लिए सड़क बनानी है।
भास्कर: आगे आबादी भूमि है, जहां पुराना गांव था, अब वहां किसी का खेत या ढाणी नहीं है।
एक्सईएन: कटाण रास्ते से एक व्यक्ति लोगों को आने जाने नहीं दे रहा हैं, इसलिए आगे तक रोड बना रहे हैं।
भास्कर: आगे न खेत है और न ही ढाणी, बॉर्डर का गेट है तो लोगों को आगे कहां जाना है?
एक्सईएन: ऐसी मेरी जानकारी में नहीं है, दो साल से सड़क बंद ही पड़ी है।
भास्कर: क्या कोई राजनीतिक प्रेशर है रोड बनाने का या कुछ और कारण?
एक्सईएन: ऐसा नहीं हैं, तहसीलदार ने कहा था कि आगे रोड बनानी है।


