गुरु घासीदास बाबा सामाजिक समरसता मानवता, सत्य के उपासक थे: डॉ. ललित

भास्कर न्यूज |रायगढ़ शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय में संत शिरोमणि गुरु घासीदास की जयंती मनाई गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. डॉ. ललित प्रकाश पटैरिया ने कहा कि गुरु घासीदास सामाजिक समरसता, मानवता, सत्य के उपासक थे। उन्होंने समाज को ‘मनखे-मनखे एक समान‘ का अमर संदेश दिया। उनका जीवन सत्य, अहिंसा, समानता और मानव मूल्यों की मिसाल थे। उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक है। कुलपति प्रो. पटेरिया ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु घासीदास के सात वचनों में सतनाम पर विश्वास रखना। जीव हत्या नही करना, मांसाहार नहीं करना, चोरी, जुआ से दूर रहना, नशा सेवन नही करना, जाति-पाति के प्रपंच में नहीं पड़ना व व्यभिचार नहीं करना जैसी बातें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बाबा गुरु घासीदास की सीख आज भी प्रासंगिक है और वे आज भी उनका अनुसरण करते है। उन्होंने कहा गुरु घासीदास ने अपने दिव्य ज्ञान और सरल उपदेशों के माध्यम से लाखों लोगों के जीवन को नई दिशा दी। उनके सिद्धांत और उपदेश केवल सतनाम पंथ के अनुयायियों के लिए ही नही बल्कि संपूर्ण मानव जाति के लिए प्रेरणा का स्रोत है। कुलसचिव डॉ. तरुण धर दीवान ने कहा गुरु घासीदास बाबा ने शिक्षा के माध्यम से छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में सामाजिक सुधार की एक नई शुरुआत की थी। गुरु घासीदास ने समाज में व्याप्त जातिगत विषमताओं को नकारा। वे पशुओं पर क्रूरतापूर्वक व्यवहार के खिलाफ थे। उनके संदेशों का समाज का समाज के पिछड़े समुदाय पर गहरा असर पड़ा। गुरु घासीदास के संदेशों और उनकी जीवनी का प्रसार पंथी गीतों एवं नृत्य के माध्यम से भी व्यापक रूप से हुआ। डॉ. लक्षेश्वरी कुर्रे ने गुरु घासीदास बाबा के विचारों एवं उनके सामाजिक योगदान पर विचार व्यक्त किए।

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