भोपाल एम्स की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा के आत्महत्या प्रयास के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। प्रकरण में हिंदू उत्सव समिति एवं संस्कृति बचाओ मंच ने एम्स प्रशासन और ट्रॉमा एंड इमरजेंसी विभाग के पूर्व एचओडी डॉ. मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का कहना है कि केवल पद से हटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि महिला डॉक्टर को आत्महत्या के लिए प्रताड़ित करने के आरोप में डॉ. यूनुस के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने आरोप लगाते हुए कहा कि डॉ. यूनुस द्वारा डॉ. रश्मि वर्मा को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। इसी दबाव और प्रताड़ना के चलते उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया। तिवारी का दावा है कि डॉ. यूनुस पहले भी विवादों में रहे हैं और भोपाल एम्स से पहले शिलांग स्थित इंदिरा गांधी रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज (आईजीआरआईएचएमएस) में उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें वहां से हटाया गया था। डॉ. रश्मि वर्मा ने एनेस्थीसिया की हाई डोज लेकर आत्महत्या की कोशिश की थी। समय रहते उन्हें एम्स लाया गया, जहां से अब भी उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत नाजुक बनी हुई है और वे जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही हैं। इस घटना के बाद एम्स प्रबंधन ने ट्रॉमा एंड इमरजेंसी विभाग के एचओडी डॉ. मोहम्मद यूनुस को पद से हटा दिया है, लेकिन हिंदू उत्सव समिति का कहना है कि कार्रवाई नाकाफी है। संगठन ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष आपराधिक जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। एम्स डॉक्टर की सांसें 7 मिनट के लिए थमीं…ब्रेन डैमेज
भोपाल एम्स की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा का मामला अब सिर्फ एक आत्महत्या के प्रयास या मेडिकल इमरजेंसी तक सीमित नहीं रहा। इस केस ने सवाल खड़े किए हैं कि क्या डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सरकार गंभीर है? पढ़ें पूरी खबर


