भिंड नगर पालिका परिषद पिछले कुछ महीनों से राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है। पार्षद नाराज हैं। सीधे तौर पर त्याग पत्र देने की बात कर चुके हैं। आज परिषद की मीटिंग में 39 में 14 पार्षद उपस्थित हुए। इन पार्षदों ने कई विकास कार्यों पर समहति जाहिर कर अपने अपने वार्डों में स्वीकृति कराई। परिषद में लंबे समय से भ्रष्टाचार को लेकर चर्चा में बनी रहती है। अब इन दिनों एक नई बहस हो रही है, जिसमें एक स्थानीय सत्ताधारी दल के नेता की दखल अंदाजी से पार्षद नाराज है। नेता हर मीटिंग अपने मुताबिक सीधे कार्य कराते हैं। कहा जाता है कि जो पार्षद विरोध दर्ज कराना चाहते है। उन्हें भी चुप करा दिया जाता है। ऐसे में पार्षदगण अपने को पावर लैस महसूस कर रहे हैं। इसी बात से नाराज होकर शहर के 25 पार्षद एकमत हो गए है। वे विरोध में आ गए है। पिछले दिनों पार्षदों ने अपने इस्तीफा वायरल करते हुए कहा था कि परिषद में ऐसे हिस्सा नहीं ले सकते है। इस्तीफा की तैयारी करने वाले पार्षदों का कहना है कि दो साल में अपने वार्ड में एक रूपए का काम नहीं करा पाए है। ऐसे में पार्षद रहकर या मीटिंग हिस्सा लेकर क्या करेंगे। उपाध्यक्ष का रूम खाली कराने की कवायद
नगर पालिका परिषद की बैठक में उपाध्यक्ष समेत 25 पार्षद सीधे विरोध में उतरे। आज की बैठक में अध्यक्ष वर्षा वाल्मीकि, नेता प्रति पक्ष राहुल सिंह राजावत समेत कुल 14 पार्षदों ने हिस्सा लिया है। बैठक में कुल 15 काम स्वीकृत किए गए है। बैठक में बाद उपाध्यक्ष भानु प्रताप भदौरिया का कमरा खाली कराए जाने की कवायद पर चर्चा की गई। लेकिन इस दौरान कोई निर्णय नहीं हो सका। विरोध दर्ज कराने वाले पार्षदों की पीड़ा बैठक में आज इन मुद्दों पर सहमति विकास कार्य पर हुई चर्चा
नगर पालिका नेता प्रतिपक्ष राहुल सिंह कुशवाह ने कहा कि जो जिनके मुद्दे थे वे आए जिनके मुद्दे नहीं थे वे नहीं आए। नगर पालिका कर्मियों की ओर से फोन किए गए थे। बढ़ी संख्या में पार्षद गैरमौजूद रहे। बैठक में सहमति बनी है। विकास कार्य कराए जाएंगे। दो साल से वार्डों का नहीं हुआ विकास
इधर उपाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह भदौरिया का कहना है कि पार्षद की बैठक से पहले निर्णय हो जाते है। दो दो साल हो गए, विकास कार्य वार्डों में नहीं हो रहे है। मैं किन्हीं कारणों से उपस्थित बैठक में नहीं हुआ।


