तीनों सेनाओं ने नवंबर के पहले सप्ताह में ‘त्रिशूल’ युद्धाभ्यास में 40 से 50 सैनिकों ने किया अभ्यास: अक्टूबर से लेकर अब तक ब्रिगेड, डिवीजन और कोर लेवल के युद्धाभ्यास हो चुके डीडी वैष्णव .जोधपुर| ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को पराजित करने के बाद भारत की तीनों सेनाएं लगातार थार के रेगिस्तान से लेकर रण ऑफ कच्छ और अरब सागर पर युद्धाभ्यास में जुटी हैं। ड्रोन, रोबोट वारफेयर के लिए सेना को तैयार करने के लिए लगातार मॉर्डर वारफेयर का अभ्यास किया जा रहा है। इसकी शुरुआत नवंबर के पहले सप्ताह से ‘त्रिशूल’ युद्धाभ्यास से हुई। 12 दिन तक चले इस युद्धाभ्यास में आर्मी की 21 सुदर्शन चक्र स्ट्राइक कोर, एयरफोर्स की दक्षिण पश्चिम एयर कमान के सभी एयर बेस और पश्चिम नौसेना कमान शामिल रही। इसमें 40 से 50 हजार सैनिक ने जमीन, आसमान और पानी में एक साथ मॉर्डन वारफेयर का अभ्यास किया। इसके बाद से अब तक एक माह में आर्मी के 15 से ज्यादा हर लेवल के युद्धाभ्यास हो चुके है। इनमें थार शक्ति, त्रिशक्ति, अखंड प्रहार, मरुज्वाला, सुदर्शन क्षमता, वायु समन्वय, त्रिनेत्र, अग्नि दृष्टि, शाहबाज छाया, रण छवि नाम से युद्धाभ्यास किए गएहैं। ये ब्रिगेड, डिवीजन व कोर स्तर के शामिल है। इन दिनों बाड़मेर क्षेत्र में जोधपुर स्थित कोणार्क कोर के अधीन आने वाली गोल्डन कटार डिवीजन का युद्धाभ्यास बाड़मेर से लेकर कच्छ तक में चल रहा हैं। सर्दी शुरू होते ही थार के रेगिस्तान में देश भर से सेना की हर फॉर्मेशन युद्धाभ्यास के लिए पहुंचती है। लेकिन इस बार सेना युद्ध को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने के लिए पूरी ताकत झोंके हुए है।


