रामगढ़ जिले में शनिवार सुबह माया डूंगरी जंगल के पास घाटी में हाथियों का एक झुंड देखा गया। ये हाथी जंगल से निकलकर घाटी पार कर रहे थे, जिसके कारण राष्ट्रीय राजमार्ग 33 (NH-33) पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। हाथियों के अचानक सड़क पर आने से वाहन चालकों और यात्रियों में हड़कंप मच गया। घने कोहरे और ठंड के बीच गाड़ियों की कतारें लग गईं, जिससे यातायात घंटों तक ठप रहा। हाथियों को सुरक्षित कॉरिडोर की ओर खदेड़ा सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। टीम ने सूझबूझ और सतर्कता दिखाते हुए हाथियों को नियंत्रित किया और उन्हें सुरक्षित कॉरिडोर की ओर खदेड़ा। इस त्वरित कार्रवाई से एक बड़े हादसे को टाल दिया गया। हाथियों के हटने के बाद घंटों से रुका यातायात सामान्य हो सका। रामगढ़ जिले में जंगली हाथियों की आवाजाही वन विभाग के लिए लगातार एक चुनौती बनी हुई है। ठंड और कोहरे के इस मौसम में मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बनी हुई है, जिसके मद्देनजर वन विभाग लगातार अलर्ट पर है। झुंड से बिछड़कर उग्र हो गए हैं हाथी इधर, जिले में एलिफेंट कॉरिडोर में छेड़छाड़ के कारण हाथियों का झुंड भटक गया है और झुंड से बिछड़े हाथी उग्र हो गए हैं। रामगढ़ के मांडू, कुजू, हजारीबाग के चरही, विष्णुगढ़, बोकारो के झुमरा पहाड़ की तलहटी से होते हुए गोमिया और गोला वन क्षेत्र से बंगाल जाने के लिएहाथियों का कॉरिडोर चिह्नित है। पहले हाथियों का झुंड इन इलाकों से आते-जाते थे। लेकिन कॉरिडोर में छेड़छाड़ के कारण हाथियों का झुंड रामगढ़, कुजू, मांडू,चरही और बोकारो जिला के सीमावर्ती वन क्षेत्रों में भटक गया है, जिसमें हथनी और उनके बच्चे भी शामिल है। तीन दिन में छह लोगों को मार डाला झुंड से बिछड़ने के बाद हाथी बेकाबू हो गए हैं और तीन दिन में छह लोगों को मार डाला। हाथियों का प्राकृतिक आवागमन मार्ग अवैध अतिक्रमण और विकास कार्यों के कारण बाधित हो गया है। जिससे बेकाबू होकर हाथी खेतों, घरों और सड़कों पर हमला कर रहे हैं।


