हाईकोर्ट जज मनोज गर्ग आए नागौर:बोले- आज भी प्रदेश में बच्चे भीख मांग रहे, उनको शिक्षा दिलाना और भिक्षावृत्ति से दूर करना जरूरी

राजस्थान हाईकोर्ट किशोर न्याय समिति अध्यक्ष राजस्थान हाईकोर्ट जज मनाेज कुमार गर्ग नागाैर आए। जज मनोज गर्ग ने नागौर पहुंचकर नूतन प्रभात मूक-बधिर-दृष्टिबाधित विद्यालय, संप्रेषण व किशोर गृह और मानसिक विमंदित पुनर्वास गृह का निरीक्षण किया। इसके बाद जज मनोज गर्ग ने जिला परिषद में प्रशासनिक, पुलिस, सामाजिक न्याय अाधिकारिता, बाल अधिकारिता, शिक्षा, चिकित्सा समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। जज मनोज गर्ग ने कहा कि न्याय व्यवस्था में देरी की सबसे बड़ी वजह कई मजबूत साक्ष्यों की कमी होती है, हाल ही जोधपुर में 2.5 महीने की बच्ची से रेप की घटना सामने आई। लेकिन अस्पताल से मेडिकल रिपोर्ट लेट आने की वजह से 2 माह बाद चालान पेश हो सका। पुलिस को अपराध की तुरंत सूचना ना देना भी गलत है। महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण को लेकर विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में नेपाल से आई एक युवती ने परिजनाें के साथ जाने से मना कर दिया तो काउंसलिंग के बाद उसे परिजनों के साथ भेजा गया। कलकत्ता से देह व्यापार में धकेली गई युवती को जोधपुर में रेस्क्यू किया गया। निराश्रितों को स्किल डवलपमेंट प्रोग्राम्स से जोड़ा जा रहा है। नारी निकेतनों में भामाशाहों की मदद से वाद्य यंत्र और सिलाई मशीनें दी जा रही हैं, ताकि वहां मौजूद महिलाओं का पुनर्वास किया जा सके। जोधपुर में बेघर परिवारों के लिए भोजन के पैकेट बांटे रहे हैं। निराश्रित बच्चों के आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं और उनको शिक्षा से जोड़ने की कवायद चल रही है। विकलांग बच्चों के लिए चल रहीं विभिन्न योजनाओं के लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। बैठक में जिला जज अरूण बेरिवाल ने नागौर न्यायिक अधिकारियों की ओर से जज मनोज गर्ग का स्वागत किया। बैठक में जिला कलेक्टर अरूण कुमार पुरोहित ने कहा कि नागौर में महिलाओं व बच्चों के लिए महिला अधिकारिता, समाज कल्याण और पुलिस की संयुक्त बैठकें नियमित की जा रही हैं। पेंशन वेरिफिकेशन किए जा रहे हैं, इस वित्तीय वर्ष के 75 फीसदी से अधिक सत्यापन हो चुके हैं। पालनहार योजना की रेगुलर मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि बेसहारा महिलाओं और बच्चों को सहायता मिल सके। सर्दी के माैसम को देखते हुए शेल्टर हाेम्स की व्यवस्थाएं दुरूस्त की गई हैं। नागौर एसपी नारायण टोगस ने हाईकोर्ट जज मनोज गर्ग को जानकारी देते हुए बताया कि नागौर जिला मुख्यालय पर महिला पुलिस थाना और िजले के प्रत्येक थाने में महिला सुरक्षा सलाह केंद्र स्थापित है, जहां सब इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी संबंधित पीड़ितों की काउंसलिंग करते हैं। पिछले साल पोक्सो के 105 मुकदमे दर्ज हुए जिनमें से 59 मुकदमाें का चालान पेश किया जा चुका है। नागौर जिले में हाल ही में थांवला थाना क्षेत्र में 7 वर्षीय छात्रा के साथ दुष्कर्म मामले में बिना किसी सबूत और गवाह के पुलिस ने घटना के 10वें दिन आरोपी को दस्तयाब किया। सर्दी को देखते हुए लायंस क्लब के साथ मिलकर पुलिस ने निराश्रित बच्चों को कंबल वितरण किए हैं। बाल श्रम की रोकथाम के लिए महिला कल्याण मंडल एनजीओ के साथ मिलकर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। नागौर पुलिस की महिला कार्मिक हर स्कूल में जाकर छात्राओं को सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण दे रही हैं। जज मनोज गर्ग ने कहा कि स्कूलों में बच्चों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं बहुत गंभीर होती हैं, हालांकि नागौर में ऐसा कोई घटनाक्रम नहीं है। जिला, उपखंड व ग्राम पंचायत स्तर पर बाल अधिकार संरक्षण समिति गठित की जानी चाहिए। सीएमएचओ डाॅ. जुगलकिशोर सैनी ने बताया कि हर सोमवार को विभाग की ओर से विकलांग बच्चों की जांच की जाती है और संबंधित उपचार भी किया जाता है। बाल कल्याण समिति ने जगह की कमी को देखते हुए किशोर, शिशु और संप्रेषण गृह को अलग-अलग करने की मांग की है। इस मौके पर एडीजे-1 देव कुमार खत्री, हाईकोर्ट के वरिष्ठ सलाहकार राकेश कुमार चौधरी समेत अनेक न्यायिक, प्रशासनिक व विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे। बाल सचिवालय की कृष्णा वैष्णव ने संचालन किया। हाईकोर्ट जज मनोज गर्ग ने दैनिक भास्कर में बातचीत में कहा कि जो भीख मांगने वाले बच्चे हैं उनकी प्रवृत्ति बदलने की जरूरत है। उनको शिक्षा से जोड़ने और भिक्षावृत्ति से ऊपर उठाने की जरूरत है। नशा और बलात्कार जैसे जुड़ रहे छोटे बच्चों को शिक्षा से जोड़ दिया जाए तो ऐसे काम नहीं होंगे। सबसे जरूरी है शिक्षा। बच्चों के पुनर्वास में आने वाली चुनौतियों को लेकर जज गर्ग ने कहा कि इस संबंध में न्यायिक अधिकारियों ने जोधपुर में मीटिंग की है। मीटिंग में सामने आया कि ऐसे बच्चों के पैरेंट्स बच्चों को पढ़ाई से जोड़ना नहीं चाहते और झुग्गी झोपड़ी से बाहर जाना भी नहीं चाहते हैं। उसके लिए पुनर्वास कर रहे बच्चों के अभिभावकों की काउंसलिंग करके शिक्षा से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। दैनिक भास्कर के स्टिंग के अनुसार सीमावर्ती जिलों में बच्चों की बिक्री के मामले में जज मनोज गर्ग ने कहा कि उनके संज्ञान में सिर्फ एक ही ऐसा मामला आया था, जिसमें प्रॉपर एफआईआर दर्ज करके तुरंत कार्रवाई की गई। आगे भी हमें पता चलेगा तो तुरंत कार्रवाई करेंगे। नाबालिग की उम्र सीमा कम-ज्यादा करने के सवाल पर मनोज गर्ग ने कहा कि कानून बनाने का काम व्यवस्थापिका का है, जाे करना है वहीं करेंगे।

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