भास्कर न्यूज | जालंधर लाडोवाली रोड स्थित स्कूल ऑफ एमीनेंस में शनिवार का दिन यहां पढ़े छात्रों के लिए खास था। सभी जालंधर एलुमनी एसोसिएशन के आह्वान पर स्कूल के 150 साल पूरे होने पर पहुंचे थे। स्कूल में कदम रखते ही सबके चेहरे पर रौणक दिखी। हर किसी की जुबान पर स्कूल का बदला रंग ही था। रूम नंबर 11 में शहर के नामवर इंडस्ट्रलिस्ट व डॉक्टर बैठे और क्लास अटेंड की। पूर्व छात्र सुरिंदर सैनी ने गीत सुनाया। इंडस्ट्रियलिस्ट नरेंद्र मैंगी ने जब विदाई गीत गाया तो सब भावुक हो गए। इसी दौरान माहौल को हल्का करने के लिए पूर्व छात्र तरसेम सिंह ने क्लास में गलती करने पर कैसे सजा मिलती थी, के बारे में बताया। कोट पैंट पहने तरसेम जब मुर्गा बने तो उनके साथियों की हंसी छूट गई। जैसे-जैसे क्लास में पुराने साथी आते गए, सभी की खुशी दोगुनी होती गई। सब अपनी अपनी क्लास बता रहे थे कि मेरी ग्राउंड फ्लोर पर थी, तो किसी की प्रिंसीपल दफ्तर के पीछे होती थी। इस दौरान एलुमनी एसोसिएशन के प्रधान डॉ. एसपीएस ग्रोवर ने कहा कि आज भी 40 साल बाद जब इस स्कूल में कदम रखता हूं तो पुराना समय याद आता है कि कैसे स्कूल में छिप-छिपकर गेम खेलते थे। आज भी मन खेलने को मचलता है। लेकिन डरता भी है कि कहीं बैल बजने पर डांट ही न पड़ जाए। समागम में पहुंचे पूर्व सांसद मोहिंदर केपी, पूर्व मेयर जगदीश राजा के साथ एक बैंच पर बैठे नजर आए। राजा ने मास्टर जी की मार को याद किया। बोले- जब वह स्कूल का काम नहीं करते थे तो मास्टर जी शहतूत के डंडे से पिटाई करते थे। उन्होंने स्कूल के पूर्व प्रिंसीपल भगवंत सिंह के प्रयासों को सराहा। इसी दौरान मोहिंदर केपी बोले- यहां आकर पुराने दिन याद आ जाते हैं। जहां क्रिकेट बहुत खेली। मैं टीम का कप्तान होता था। हमारे कोच दविंदर सिंह थे। हमने बहुत मैच खेले। साईं दास स्कूल से जब मैच हारते तो बहुत अफसोस होता था। वहीं पूर्व छात्र सुरिंदर सैणी ने कहा कि जब वह 1965 के दौरान पढ़ते थे तो उस दौरान भारत-पाक की लड़ाई के सायरन स्कूल में बजा करते थे। इसी के साथ वह बताते हैं कि पाकिस्तान का नैशनल एंथम लिखने वाले हफीज जालंधरी भी यहीं के पूर्व छात्र थे। इसी के साथ टोबा टेक सिंह के पिता व मशहूर प्रोड्यूसर यश राज भी यहां पढ़ा करते थे।


