लाभुक की जगह एजेंसी को किया 40 लाख पेमेंट

भास्कर इनसाइट बोकारो के कसमार प्रखंड में 15वें वित्त आयोग के तहत करीब 40 लाख की 15 योजनाओं की गड़बड़ी का मामला सामने आया है। यह खुलासा आरटीआई से हुई है। इसमें मजेदार बात यह है कि चयनित लाभुक समिति को कुछ पता भी नहीं है। लाभुक समिति का कोरम पूरा कर निजी एजेंसियों के माध्यम से योजनाओं का काम कराया गया है। इस संबंध में बगदा पंचायत की पंसस के पति नीरज भट्टाचार्य को आरटीआई से मिली सूचना के आधार पर खुलासा हुआ है। आरोप है कि बिना आम सभा के फर्जी लाभुक समिति गठित कर योजनाओं की राशि लाभुकों के खाते में देने की बजाय सीधे एमएस नूर अली, एमएस प्राची, नेट स्क्वायर व आरके सेल्स के खाता में भुगतान किया गया है, जो सरकारी नियम का उल्लंघन है। उप प्रमुख संजू कुमारी समेत 12 पंचायत के पंचायत समिति सदस्यों ने इसे लेकर निगरानी ब्यूरो व मंत्रीमंडल निगरानी विभाग की प्रधान सचिव वंदना डाडेल को पत्र लिखकर शिकायत की है। पत्र की प्रतिलिपि बोकारो उपायुक्त व डीडीसी को भी दी गई है। योजनाओं के सभी अभिलेख में प्रमुख का हस्ताक्षर है। प्रमुख नियोति दे अभिलेखों में हस्ताक्षर करने की बात से इंकार कर रही है। वहीं बीडीओ नम्रता जोशी ने इस संबंध में बयान देने से इंकार कर दिया। आरटीआई कार्यकर्ता नीरज भट्टाचार्य ने बताया कि योजनाओं का प्राक्कलन भी सही नहीं है। जलमीनार योजना करीब दो लाख, वाटर प्यूरीफायर करीब 80 हजार की होनी चाहिए। वहीं आंगनबाड़ी सौन्दर्यीकरण का काम ढाई लाख दिखाया गया है, लेकिन 50 से 60 हजार ही मात्र खर्च हुआ है। लाभुक को कुछ पता नहीं, हो गया भुगतान महिला होमगार्ड जवान के पति से आधार कार्ड लेकर लाभुक बना दिया और शौचालय के लाभुक के दस्तावेज से वाटर प्यूरी फायर योजना का लाभुक बना दिया। हिसीम में दो लाख 49 हजार 900 का जलमीनार योजना के लाभुक संजय हेंब्रम (होमगार्ड जवान के पति) से पूछताछ करने पर बताया कि एक जेई ने उनका आधार कार्ड मांगा था, बाकी मुझे कुछ मालूम नहीं है। खैराचातर निवासी मोहित दे, कसमार थाना में दो लाख 49 हजार 900 रुपए की लागत से लगे वाटर प्यूरीफायर का लाभुक है। लेकिन मजेदार बात यह है कि मोहित इस योजना के लाभुक समिति अध्यक्ष बनने की बात से भी अनभिज्ञ है। मोहित ने 2025 में मेरम हारा स्कूल में शौचालय योजना के लिए अपना कागजात दिया था, जिसका इस्तेमाल कर वर्तमान में हेराफेरी की गई है। हिसीम कटहल टोला में स्थापित एक जलमीनार योजना में दो-दो लाभुक का नाम होने का मामला सामने आया।

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