उज्जैन में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष महाधिवेशन रविवार दोपहर को कालिदास अकादमी परिसर में शुरू हुआ। इस अधिवेशन में भारत के विभिन्न राज्यों से आए प्रमुख ज्योतिषाचार्य शामिल हुए। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय काल गणना को प्रचलन में लाने पर विद्वानों द्वारा चिंतन करना है। इस महाधिवेशन का आयोजन सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, कालिदास संस्कृत अकादमी, पूर्णश्री फाउंडेशन, आचार्य वराहमिहिर न्यास, सम्राट विक्रमादित्य विद्वत परिषद् और साउथ एशियन एस्ट्रो फेडरेशन (नेपाल) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है। शुभारंभ अवसर पर समाजसेवी नरेश शर्मा, पुराविद डॉ. रमण सोलंकी, डॉ. गोविंद गंधे, प्रो. बीके आंजना और आचार्य चूड़ामणि पांडेय अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कुलगुरू प्रो. अर्पण भारद्वाज ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। डॉ. एस रावत दिल्ली और प्रो. निलिम्प त्रिपाठी भी विशेष रूप से शामिल हुए। यह विज्ञान और गणना पर आधारित विधा ज्योतिषाचार्य कैलाशपति नायक ने ‘समय का भारतीयकरण’ किए जाने की मांग पर तथ्यों के साथ अपनी बात रखी। कार्यक्रम संयोजक ज्योतिषाचार्य सर्वेश्वर शर्मा ने स्पष्ट किया कि ज्योतिष लोगों में भय पैदा करने के लिए नहीं है, न ही यह भविष्य बदलने का दावा करता है। यह विज्ञान और गणना पर आधारित एक विधा है। अध्यक्षता कर रहे प्रो. अर्पण भारद्वाज ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और शासन द्वारा भारतीय काल गणना को प्रभावी बनाने की योजना पर लगातार कार्य किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से यह अधिवेशन आयोजित किया गया है, क्योंकि उज्जैन कालगणना का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि अधिवेशन से प्राप्त सुझाव मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. महेंद्र पंड्या ने किया और आभार डॉ. रश्मि मिश्रा ने व्यक्त किया। कई राज्यों के विद्वान पहुंचे हैं
दो दिवसीय अधिवेशन में मध्यप्रदेश के अलावा गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के विद्वान व्याख्यान देने पहुंचे हैं। ये सभी विद्वान भारतीय ज्योतिष के विभिन्न आयामों के साथ ही काल गणना पर व्याख्यान देंगे। सोमवार को सुबह 10 बजे से निरंतर चार अकादमिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। शाम 4 बजे समापन समारोह में सहभागी विद्वानों का सम्मान किया जाएगा।


