पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी लुधियाना में सड़क चौड़ी करने के नाम पर 100 पेड़ों को काटने की तैयार की जा रही है। काटे जाने वाले पेड़ों पर बाकायदा काले रंग से क्रॉस के निशान भी लगा दिए गए हैं। पब्लिक एक्शन कमेटी को जैसे ही पेड़ काटे जाने की भनक लगी तो उन्होंने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को एक पत्र लिखकर विरोध जता दिया। वहीं पब्लिक एक्शन कमेटी के डॉ अमनदीप सिंह बैंस, कपिल देव व कुलदीप सिंह खैहरा ने पीएयू में पेड़ों को काटे जाने से रोकने के लिए स्टूडेंट्स व पर्यावरण प्रेमियों को आगे आने को कहा। उन्होंने कहा कि पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में अगर इस तरह से पेड़ काटे जाएंगे तो बाकी महकमों से क्या उम्मीद की जा सकती है। सड़क चौड़ी करने की कोई जरूरत नहीं डॉ अमनदीप सिंह बैंस व कपिल देव ने कहा कि पीएयू गेट नंबर दो से थापर हॉल तक सड़क पर्याप्त चौड़ी है। पीएयू के अंदर तो किसी तरह का ट्रैफिक जाम भी नहीं लगता है। वहीं पीएयू के एडमिन ब्लॉक थापर हॉल जाने के लिए अब पीएयू गेट नंबर एक का इस्तेमाल होता है। ऐसे में इस सड़क को चौड़ी करने की जरूरत ही नहीं है। 100 से ज्यादा पेड़ों पर लगाए क्रॉस के निशान डॉ अमनदीप सिंह बैंस ने बताया कि पीएयू में गेट नंबर दो से एंट्री करने के बाद जो पहला राउंड अबाउट आता है वहां से थापर हॉल के सामने गेहूं बाली चौक तक करीब 100 पेड़ों पर क्रॉस के निशान लगा दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन जल्दी ही इन पेड़ों को कटवा देगा। हरित क्रांति लाने वाली यूनिवर्सिटी कैसे काट सकती है पेड़ कपिल देव ने कहा कि हरित क्रांति लाने वाली पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी कैसे पेड़ काटने की अनुमति दे सकती है। उन्होंने कहा कि पीएयू के वाइस चांसलर डॉ एस एस गोसल बड़े साइंटिस्ट हैं उन्हें इस तरह का फैसला नहीं लेना चाहिए। उन्होंने वीसी से मांग की है कि तुरंत इस फैसले काे वापस लिया जाए। पीएयू में हर सड़क पर अलग-अलग पेड़ों की लेन पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी को डिजाइन करते वक्त यह तय किया गया था कि एक लेन पर एक ही तरह के पेड़ लगाए जाएंगे। यह परंपरा अब तक निभाई जा रही है। हर सड़क पर अलग-अलग प्रजाति के पेड़ हैं और उनके बीच में कोई अन्य प्रजाति के पेड़ नहीं लगाए जाते हैं। पीएयू के पूर्व वीसी कंग ने पेड़ सूखने पर निकाली थी शव यात्रा लुधियाना नगर निगम ने 2009 के आसपास फिरोजपुर रोड पर डिवाइडर के बीच में कुछ पौधे लगाए थे। जिसमें से कई पौधे आठ से दस फीट के थे। उस समय उनमें से एक आठ से दस फीट का पेड़ सूख गया था। पीएयू के वीसी डॉ मनजीत सिंह कंग ने पेड़ सूखने पर दुख जताया और स्टूडेंट्स को साथ लेकर उस पेड़ की शव यात्रा तक निकाल दी थी। कुलदीप खैहरा का कहना है कि जिस यूनिवर्सिटी में ऐसे वीसी रहे हैं आज उसी यूनिवर्सिटी में सड़क चौड़ी करने के नाम पर 100 पेड़ काटे जा रहे हैं। उन्होंंने वीसी से अपील की है कि इस मामले पर पुनर्विचार किया जाए ताकि पीएयू की ग्रीनरी को नुकसान न हो। सोशल मीडिया के जरिए कैंपेन शुरू पीएसी ने जैसे ही यह मुद्दा उठाया तो पीएयू के पूर्व विद्यार्थियों से लेकर अन्य लोगों ने भी सोशल मीडिया पर इसका विरोध करना शुरू कर दिया। लोगों का कहना है कि पीएयू के अंदर सड़क चौड़ी करने की आवश्यकता नहीं है इसलिए वहां पर पेड़ न काटे जाएं। अमेरिकी आर्किटेक्ट एडवर्ड ड्यूरल स्टोन ने डिजाइन की थी पीएयू पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी की स्थापना डॉ एमएस रंधावा के नेतृत्व में हुई। उन्हें यूनिवर्सिटी का पहला वाइस चांसलर नियुक्त किया गया। उन्होंने अमेरिकी आर्किटेक्ट एडवर्ड ड्यूरल स्टोन को बुलाकर डिजाइन तैयार करवाया। डॉ रंधावा ने ग्रीन कैंपस कंसेप्ट के आधार पर यूनिवर्सिटी का डिजाइन तैयार करवाया था। चौड़ी सड़कें और दोनों तरफ विशेष पेड़ा पौधे डॉ एमएस रंधावा ने इसी तरह यूनिवर्सिटी को डिजाइन करवाया था। उनकी सोच थी कि यूनिवर्सिटी कैंपस को ग्रीन कैंपस के तौर पर डेवलप किया जाए। उसकी ध्यान में रखते हुए पीएयू में चौड़ी सड़कें बनवाई गई और उनके दोनों किनारों पर पेड़ लगाए गए।


