मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड का दौर रात के साथ दिन में जारी है। रविवार को सीजन में पहली बार पारा अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया। ग्वालियर, दतिया समेत 10 जिलों में कोल्ड डे की स्थिति बनी रही। मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को खजुराहो में अधिकतम तापमान 16 डिग्री, सतना में 16.9 डिग्री, रीवा में 17 डिग्री, नौगांव में 18 डिग्री, दतिया में 18.6 डिग्री, ग्वालियर-सीधी में 18.2 डिग्री, टीकमगढ़ में 19 डिग्री, मलाजखंड में 21.8 डिग्री, नरसिंहपुर में 22.2 डिग्री, उमरिया में 23.9 डिग्री और दमोह में 24.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इन जगहों पर कोल्ड डे की स्थिति रही। सतना में एक ही दिन में पारा 6.8 डिग्री लुढ़का
रविवार को सतना में एक ही दिन में पारा 6.8 डिग्री तक लुढ़का। वहीं, टीकमगढ़ में 6.5 डिग्री, खजुराहो में 6.4 डिग्री, नौगांव में 4.7 डिग्री, रीवा में 4.4 डिग्री, दतिया में 3.6 डिग्री, श्योपुर में 3.6 डिग्री की गिरावट हुई। दतिया में कोहरे के कारण भीषण हादसा दतिया में नेशनल हाईवे-44 पर चिरुला थाना क्षेत्र में यह हादसा हुआ। शनिवार रात में घना कोहरा था, जिससे सड़क पर आगे चल रहा कंटेनर दिखाई नहीं दिया। इसी दौरान तेज रफ्तार कार ने पहले बाइक को टक्कर मारी। बाइक सीधे कंटेनर में जा घुसी। पीछे से कार भी कंटेनर से टकरा गई। हादसा इतना भीषण था कि कार और बाइक के परखच्चे उड़ गए। इन ट्रेनों पर सबसे ज्यादा असर
कोहरे की वजह से दिल्ली की ओर से आने वाली ट्रेनों पर सबसे ज्यादा असर है। दरअसल, उत्तरी राज्यों में भी कोहरा छा रहा है। इस वजह से वहां से एमपी के इंदौर, भोपाल, ग्वालियर-उज्जैन की ओर आने वाली ट्रेनें अपने समय पर नहीं आ रही है। मालवा, झेलम, शताब्दी, सचखंड, पंजाब मेल जैसी कई ट्रेनें तय समय से 8 घंटा तक लेट आ रही है। 16 दिसंबर से कोहरे का असर फ्लाइट और ट्रेनों पर दिखना शुरू हुआ था। इस वजह से जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है। भोपाल में मालवा एक्सप्रेस के पहुंचने का समय सुबह 7.25 बजे निर्धारित है, जो शनिवार को दोपहर डेढ़ बजे आई थी। इस कारण यह ट्रेन उज्जैन में शाम 5 बजे और इंदौर में 7 बजे पहुंची, जबकि आखिरी स्टेशन इंदौर में इसका तय समय दोपहर 1.35 बजे का है। मौसम विभाग ने कोहरे की एडवाइजरी जारी की
लगातार कोहरे की स्थिति बनने से मौसम विभाग ने भी ट्रैवल, कृषि और स्वास्थ्य को लेकर एडवाइजरी जारी की है। इनमें से सबसे ज्यादा फोकस ट्रैवल को लेकर है। मौसम विभाग ने लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग करने की सलाह दी है। कहा है कि कम विजिबिलिटी की वजह से अनावश्यक यात्रा से बचें। जरूरी हो तो कार का फॉग लैंप और बीम हेडलाइट का उपयोग करें। ड्राइविंग धीरे करें। हेल्थ- तेज ठंड होने पर शरीर की गर्माहट बनाए रखने के लिए सिर, गर्दन, हाथ-पैर की उंगलियों को अच्छे से ढंके। फ्लू, सर्दी, खांसी-जुकाम होने पर डॉक्टर को दिखाए। विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं। कोहरे में मौजूद कण और विभिन्न प्रकार के प्रदूषकों के संपर्क में आने से फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो सकती है। खांसी और सांस लेने में कठिनाई होगी। इसलिए नियमित व्यायाम करते हुए मास्क का उपयोग करें। शीतलहर की स्थिति में गर्म कपडे जरूर पहनें। कृषि- लंबे समय तक कोहरे के कारण फसलों में अत्यधिक नमी और संभावित रोगों से बचाव जरूर करें। पशु शाला में उचित वेंटिलेशन तय करें। टमाटर, मिर्च, फूलगोभी, सरसों की फसल का विशेष तौर पर ध्यान रखें। प्रदेश में पहली बार पारा 3 डिग्री से नीचे
कई शहरों में पारे में गिरावट का दौर जारी रहा। शुक्रवार-शनिवार की रात में पारा पहली बार 3 डिग्री से नीचे पहुंच गया। शहडोल के कल्याणपुर में तापमान 2.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उमरिया में 4.3 डिग्री, अनूपपुर के अमरकंटक में 4.6 डिग्री रहा। इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में 5.2 डिग्री, राजगढ़ में 5.4 डिग्री, रीवा में 5.5 डिग्री, मलाजखंड में 5.6 डिग्री, नौगांव में 6.1 डिग्री, रायसेन-छिंदवाड़ा में 6.8 डिग्री, दतिया-सतना में 7.1 डिग्री, मंडला में 7.3 डिग्री, खजुराहो-दमोह में 7.4 डिग्री, बैतूल में 7.5 डिग्री, खंडवा-नरसिंहपुर में 8.4 डिग्री, सागर में 8.9 डिग्री, शिवपुरी में 9 डिग्री, खरगोन में 9.2 डिग्री, सिवनी में 9.4 डिग्री और रतलाम में 9.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश के 5 बड़े शहरों में इंदौर में सबसे कम 5.6 डिग्री, भोपाल में 6.2 डिग्री, ग्वालियर में 7.5 डिग्री, उज्जैन में 8.5 डिग्री और जबलपुर में 7.4 डिग्री तापमान रहा। जेट स्ट्रीम की रफ्तार 194 किमी प्रतिघंटा
वर्तमान में जेट स्ट्रीम भी चल रही है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम का असर है। यह जमीन से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 194 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बह रही है। जिसका असर एमपी में भी है। अब जानिए, क्या होती है जेट स्ट्रीम?
मौसम एक्सपर्ट की माने तो प्रदेश में ठंड बढ़ने की वजह खास वजह जेट स्ट्रीम भी है। यह जमीन से लगभग 12 किमी ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा है। इस बार रफ्तार 222 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई है। यह देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा के अलावा ये ऊंची हवा सर्दी बढ़ा रही है। उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी हवा और पहाड़ी इलाकों से बर्फीली हवा हमारे यहां आती है, तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही हो रहा है। नवंबर-दिसंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी है सर्दी
इस बार नवंबर के बाद दिसंबर में भी सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। नवंबर में भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, 17 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इससे पहले 30 नवंबर 1941 में तापमान 6.1 डिग्री रहा था। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री ही रहा। यहां भी सीजन की सबसे सर्द रात रही। 25 साल में पहली बार पारा इतना लुढ़का। दूसरी ओर, दिसंबर में इंदौर में पारा सबसे कम रहा। भोपाल में भी यह 5 डिग्री से नीचे पहुंच चुका है। ठंड के लिए दिसंबर-जनवरी खास
मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्प्रेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से दिसंबर में मावठा भी गिरता है। इससे दिन में भी सर्दी का असर बढ़ जाता है। अब जानिए दिसंबर में कैसी रहती है ठंड? मौसम का ट्रेंड देखें तो दिसंबर में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस आते हैं। वहीं, उत्तरी हवाएं आने से दिन-रात के तापमान में गिरावट होती है। इस बार भी यही हो रहा है। शुरुआत से अब तक कई वेस्टर्न डिस्टरबेंस उत्तर भारत को प्रभावित कर चुके हैं। इस वजह से एमपी में कड़ाके की ठंड के साथ शीतलहर का असर है। इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी MP के 5 बड़े शहरों में दिसंबर में ऐसा ट्रेंड भोपाल में 3.1 डिग्री रिकॉर्ड हो चुका टेम्प्रेचर
भोपाल में दिन-रात ठंड और बारिश का ट्रेंड रहा है। 10 में से पिछले 5 साल से भोपाल दिसंबर में भीग रहा है। आधा से पौन इंच तक बारिश हो गई। हालांकि, इस बार अब तक बारिश नहीं हुई है। दिसंबर में ठंड की बात करें तो 11 दिसंबर 1966 की रात में पारा 3.1 डिग्री पहुंच गया था। यह अब तक का ओवरऑल रिकॉर्ड है। 3 साल पहले 2021 में पारा 3.4 डिग्री पहुंच चुका है। इंदौर में 5 से 8 डिग्री के बीच रहा है पारा
इंदौर में दिसंबर में रात का तापमान 5 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। पिछले साल तापमान 8.6 डिग्री तक पहुंच गया था। 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिन में पारा 28 से 31 डिग्री के बीच ही रहता है। इस महीने इंदौर में बारिश भी होती है। पिछले 4 साल से बारिश हो रही है। हालांकि, इस बार अब तक बारिश नहीं हुई है। 31 दिसंबर 2015 को दिन का सर्वाधिक तापमान 33 डिग्री दर्ज किया गया था। 27 दिसंबर 1936 की रात में टेम्प्रेचर 1.1 डिग्री रहा था। सर्वाधिक कुल मासिक बारिश वर्ष 1967 को 108.5 मिमी यानी 4.2 इंच हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक 53 मिमी यानी 2.1 इंच बारिश 17 दिसंबर 2009 को हुई थी। ग्वालियर में सबसे ज्यादा सर्दी, इस बार कोहरे का असर
ग्वालियर में दिन में गर्मी तो रात में ठंड रहती है। पिछले 10 साल में यहां अधिकतम तापमान 26.2 से 31.6 डिग्री तक रह चुका है। वहीं, रात में पारा 1.8 से 6.9 डिग्री दर्ज किया गया। इस बार तेज ठंड है। साथ ही घना कोहरा भी छा रहा है। 6 दिसंबर 2006 को दिन का तापमान 32.1 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है। 26 दिसंबर 1961 को न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री पहुंचा था। वर्ष 1997 में कुल मासिक बारिश 106.6 मिमी यानी 4.1 इंच हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश 13 दिसंबर 2013 को 32.1 मिमी यानी 1.2 इंच हुई थी। जबलपुर में तेज रहता है सर्दी का असर
जबलपुर में 28 दिसंबर 1960 को दिन का तापमान 33.2 डिग्री पहुंच चुका है। 28 दिसंबर 1902 की रात में तापमान 0.6 डिग्री रहा था। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वर्ष 1885 में सर्वाधिक मासिक बारिश 125 मिमी यानी 4.9 इंच हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 68.1 मिमी यानी 2.6 इंच 16 दिसंबर 1885 का है। इस बार भी कड़ाके की ठंड का दौर है। बारिश नहीं हुई है। उज्जैन में भी कड़ाके की ठंड
उज्जैन में दिन का औसत तापमान 28.2 डिग्री और रात में 9.4 डिग्री सेल्सियस है। इस महीने औसत 4.6 मिमी बारिश होती है। पिछले पांच साल से उज्जैन में दिसंबर में बारिश हो रही है, लेकिन अबकी बार एक भी दिन बारिश नहीं हुई है। 18 दिसंबर 2002 को दिन में टेम्प्रेचर 34.9 डिग्री पहुंच चुका है। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। 28 दिसंबर 1968 और 29 दिसंबर 1983 को रात में पारा 0.5 डिग्री पहुंच चुका है। वर्ष 1997 में कुल मासिक बारिश 119.4 मिमी यानी 4.7 इंच बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश की बात करें तो 11 दिसंबर 1967 को 35.3 मिमी यानी 1.3 इंच बारिश हुई थी।


