मृतक कर्मचारी के परिवार को 9 साल बाद मिला न्याय:एक्सीडेंट क्लेम के 40 लाख रुपए का चेक सौंपा, ट्रक चालक की दलीलें

पशुपालन विभाग के कर्मचारी मदन सिंह के परिवार का 9 साल लंबा संघर्ष आखिरकार खत्म हो गया है। कोर्ट के आदेश की पालना करते हुए पावटा स्थित इंडियन बैंक ने मृतक की पत्नी सुशीला कंवर और पुत्र देवेंद्र सिंह को 40 लाख रुपए का चेक सौंपा गया। औद्योगिक न्यायाधिकरण एवं श्रम न्यायालय (MACT) जोधपुर महानगर ने न केवल बीमा कंपनी को फटकार लगाई, बल्कि मृतक के आश्रितों को ब्याज सहित कुल 40 लाख रुपए का मुआवजा भी दिलाया। मदन सिंह की करीब 9 साल पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। मामले में पीठासीन अधिकारी (न्यायाधीश) देवेंद्र सिंह नागर ने 17 सितंबर को फैसला सुनाया था। तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार को कुचला था हादसा 20 जुलाई 2016 की सुबह 9:45 बजे का है। मदन सिंह (51) अपनी बाइक पर सवार होकर ड्यूटी के लिए खेतासर जा रहे थे। तिंवरी से घेवड़ा रोड पर एक मोबाइल दुकान के पास सड़क के बायीं ओर बजरी और लोहे के सरिये पड़े थे। मदन सिंह ने सावधानी बरतते हुए अपनी बाइक को धीरे कर लिया। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार से आ रहे ट्रक ड्राइवर स्वरूपराम ने बाइक सवार को कुचल दिया। जहां से बाइक सवार मदन सिंह को अस्पताल पहुंचाया गया तो डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। ट्रक ड्राइवर ने मृतक पर ही मढ़ दिया दोष कोर्ट में सुनवाई के दौरान ट्रक चालक और मालिक के वकील भंवर सिंह सांखला ने दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी मृतक मदन सिंह पर डालने की कोशिश की। वकील भंवर सिंह सांखला ने दलील दी कि ट्रक चालक की कोई गलती नहीं थी। मदन सिंह खुद बाइक लहराते हुए चला रहे थे और सड़क पर पड़े सरियों के ढेर में जा घुसे। सरिया उनकी कनपटी में लगा, जिससे वे असंतुलित होकर ट्रक के पिछले टायर के नीचे आ गिरे। बचाव पक्ष ने ठेकेदार रामचंद्र और जीवराज को भी जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की, जिन्होंने सड़क पर सामग्री फैलाई थी। कोर्ट का निष्कर्ष: ट्रक ड्राइवर की लापरवाही जिम्मेदार न्यायाधीश देवेंद्र सिंह नागर ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने चश्मदीद गवाह सुरेंद्र सिंह के बयानों और पुलिस चार्जशीट पर भरोसा जताया। कोर्ट ने माना कि यह हादसा ट्रक की तेज गति और लापरवाही के कारण ही हुआ था, न कि मृतक की गलती से। मुआवजे का गणित: कैसे तय हुई 40 लाख की राशि? कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों (प्रणय सेठी और सरला वर्मा केस) को आधार बनाते हुए मुआवजे की गणना इस प्रकार की: इस तरह मूल मुआवजा 26,78,627 रुपए बना। कोर्ट ने याचिका दायर करने की तारीख (7 अक्टूबर 2016) से 6% और भुगतान तक 9% की दर से ब्याज जोड़ा, जिससे कुल राशि करीब 40 लाख रुपए हो गई। भविष्य की सुरक्षा (FD में जमा) एडवोकेट पर्वत सिंह भाटी और जेठू सिंह भाटी ने बताया कि कोर्ट ने परिवार के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं। पत्नी सुशीला कंवर को मिले हिस्से में से 15 लाख रुपए और पुत्र देवेंद्र को मिले हिस्से में से 3 लाख रुपए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में जमा किए गए हैं। बिना कोर्ट की अनुमति के यह पैसा निकाला नहीं जा सकेगा, हालांकि इसका ब्याज उन्हें मिलता रहेगा।

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