नर्मदापुरम में जमीन पर 2476 बांस, रिकॉर्ड में 45 हजार:एक लाख के काम का 21 लाख भुगतान; कई फॉरेस्ट अफसर नपेंगे

नर्मदापुरम जिले के सिवनीमालवा वन परिक्षेत्र में बांस-भिर्रा की सफाई के नाम पर लाखों रुपए का भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। रेंजर, कर्मचारियों ने जंगल में बांस-भिर्रा की वास्तविक संख्या को 18 गुना कागजों में बताई और सफाई के नाम पर फर्जी बिल लगाकर रुपए निकाल लिए। सिवनी मालवा से 30 किमी दूर गीतखेड़ा और आमाकटारा बीट कंपार्टमेंट नंबर 372,374 में जिस बांस-भिर्रा की सफाई के नाम पर 21.31 लाख रुपए निकाले गए। वहां वास्तविक 2476 बांस-भिर्रा की सफाई भी ठीक से नहीं की गई। कई बांस भिर्रा पहले जैसी स्थिति में ही है। न उनके आसपास का कचरा ठीक किया और न आड़े-थेड़े बांस को ठीक किए गए। इससे साबित हुआ कि रेंज में बैठे अफसर और कर्मचारियों ने 2477 बांस-भिर्रा की जगह 44486 बांस-भिर्रा कागजों में दिखाया और फर्जी बिल लगाकर 21.31 लाख रुपए निकाल लिए गए। भ्रष्टाचार का फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद भी अबतक रेंजर, डिप्टी रेंजर, वनरक्षक समेत शामिल अधीनस्थ कर्मचारियों पर अब तक कार्रवाई नहीं हो पाई है। डेढ़ साल पहले मई 2023 में की गई थी सफाई सामान्य वन परिक्षेत्र सिवनी मालवा के वर्ष 2023 कंपार्टमेंट नंबर 372 एवं 374 में बांस-भिर्रा सफाई कार्य हुआ था। कंपार्टमेंट नंबर 372 में 32960 और कंपार्टमेंट नंबर 374 में 9450 बांस-भिर्रा की संख्या दिखाई गई। दोनों कंपार्टमेंट की 44886 बांस-भिर्रा सफाई के नाम पर 22,31,109 रुपए के बिलों का भुगतान कराया गया। कार्य का सत्यापन उपवनमंडल अधिकारी से लेकर रेंजर, डिप्टी रेंजर बीएल अहिरवार, वनरक्षक विजेंद्र रघुवंशी ने किया था। शिकायत के बाद एसडीओ ने की जांच भोपाल के रहने वाले मनीष राठौर ने सितंबर 2023 में बांस-भिर्रा सफाई कार्य में भ्रष्टाचार होने की शिकायत वन संरक्षक (सीसीएफ) नर्मदापुरम को की थी। सीसीएफ ने मामले जांच के आदेश दिए। सिवनी मालवा एसडीओ अनिल विश्वकर्मा ने जांच की। जांच में सामने आया कि कंपार्टमेंट नंबर 372 में बांस-भिर्रा की संख्या 1270 एवं 374 में 1206 है। जिनका खर्च 1 लाख होना चाहिए था। लेकिन रेंजर वंदना मेहतो, वनक्षेत्रपाल, वनरक्षक अधिनस्थ कर्मचारियों ने 44886 बांस-भिर्रा दिखाएं। 42410 बांस-भिर्रा अधिक दर्शाकर 21.31 लाख रुपए का भ्रष्टाचार किया। इस फर्जीवाड़े के दस्तावेज वन कर्मचारी संगठन के संरक्षक मधुकर चतुर्वेदी ने डीएफओ कार्यालय से आरटीआई लगाकर निकाले है। सफाई कार्यों को मंथली डायरी नहीं लिखा परिक्षेत्र अधिकारी सिवनी मालवा मेहतो ने उनकी मासिक निरीक्षण डायरी में उनके ‌द्वारा समय-समय पर किए उक्त बाँस भिर्रा सफाई कार्य के बारे में लिखा गया, लेकिन निरीक्षण में पाई गई कमियों एवं कर्मचारियों को कार्य की गुणवत्ता में सुधार संबंधी निर्देश का उल्लेख मासिक दौरा दैनंदिनी में नहीं किया गया। प्रमाणक तैयार करते समय परिक्षेत्र अधिकारी का यह कर्तव्य है कि मौके पर किए गए कार्य का निरीक्षण कर माप पंजी एवं गणना रजिस्टर से मिलान करने के बाद प्रमाणक तैयार किए जाएं। लेकिन परिक्षेत्र अधिकारी मेहतो के गणना रजिस्टर पर निरीक्षण संबंधी कोई हस्ताक्षर नहीं मिले। ना ही इसका परीक्षण तत्कालीन उपवनमंडल अधिकारी सिवनी मालवा द्वारा किया गया। माप पंजी और मजदूरों द्वारा प्रतिदिन किए कार्यों की भी जानकारी रजिस्टर में नहीं लिखी गई। इस प्रकार परिक्षेत्र अधिकारी सिवनी मालवा सामान्य वंदना मेहतो, वनक्षेत्रपाल बीएल अहिरवार द्वारा अपने कर्तव्यों का उल्लंघन करने के साथ-साथ वरिष्ठ कार्यालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया। परिक्षेत्र वृत्त सहायक ने मौके पर जाकर नहीं देखे कार्य रेंज के आमाकटारा परिक्षेत्र सहायक वृत (डिप्टी रेंजर) बीएल अहिरवार ने भी अपने कर्तव्यों का उल्लंघन किया गया। डिप्टी रेंजर को कार्यों का निरीक्षण कर माप पंजी में प्रविष्टि करना, गणना रजिस्टर का मौके पर किए गए कार्य से मापन के बाद मिलान कर हस्ताक्षर करना चाहिए था, लेकिन डिप्टी रेंजर ने ऐसा नहीं किया। ना ही उक्त कार्य एवं दस्तावेजों का निरीक्षण तत्कालीन उप वनमंडल अधिकारी द्वारा किया गया। गीतखेड़ा वनरक्षक (परिसर रक्षक) विजेंद्र रघुवंशी ने गणना रजिस्टर पर कुछ पृष्ठों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। जांच में पाया कि रेंजर वंदना मेहतो ने न गणना रजिस्टर का निरीक्षण किया और ना ही किसी पेज पर हस्ताक्षर किए। रेंजर ने मौके पर किए कार्यों का वेरिफिकेशन तक नहीं किया। सभी बिल आवंटित बजट को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए बनाए गए थे। रेंजर पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों अवेहलना के भी आरोप डीएफओ मयंक सिंह गुर्जर ने वन संरक्षक नर्मदापुरम को रेंजर के खिलाफ 10 अक्टूबर 2024 को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने रेंजर वंदना मेहतो द्वारा बांस भिर्रा सफाई में किए भ्रष्टाचार के साथ रेंज के वन कर्मचारियों द्वारा की शिकायत, उनकी प्रताड़ना और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवेहलना करने की भी बात कही। उन्होंने लिखा कि 17 सितंबर को ढेकना और आमाकटारा का संभाग आयुक्त निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान वन मंडलाधिकारी, एसडीएम, एसडीओ, तहसीलदार और थाना प्रभारी उपस्थित थे। सूचना होने के बावजूद रेंजर वंदना मेहतो मौके पर नहीं पहुंची। 12 अगस्त को समीक्षा बैठक में सूचना दी कि 13 अगस्त को वन मंडलाधिकारी निरीक्षण करने आएंगे। बावजूद रेंजर अनुपस्थित रही। डीएफओ ने लिखा कि रेंजर मेहतो का विभागीय कार्य नियंत्रण समाप्त हो गया है और वे अधीनस्थ कर्मचारियों में उनकी कार्यशैली और रवैए से आक्रोश है। जिस कारण रेंजर को उनके कार्यों से पृथक करने अनुशंसा की। वनकर्मी की मौत मामले में आक्रोश के बाद रेंजर को हटाया 2-3अक्टूबर की रात को सिवनीमालवा वन परिक्षेत्र के ढेकना सर्कल की नोनिया बीट में पदस्थ वनरक्षक मंगल पांडे की उपचार के दौरान मौत हो गई। विभाग के अन्य कर्मचारियों ने वन परिक्षेत्र अधिकारी वंदना महतो पर स्टॉफ के लोगों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। कर्मचारियों का कहना था कि रेंजर कई दिनों से मंगल पांडेय को घर खाली करने को लेकर नोटिस दे रही थी। साथ ही उनके घर आने वाले लोगों को गेट से अंदर भी नहीं आने देती थीं। यहां तक की दूध वाले और अन्य आवश्यक सामग्री वालों को भी गेट के अंदर नहीं आने देती है। वनरक्षक की मौत से आक्रोश होकर वन विभाग के कर्मचारी संगठन ने हड़ताल की थी। जिसके बाद रेंजर वंदना मेहतो को हटा दिया गया। सभी के खिलाफ होगी कार्रवाई डीएफओ मयंक सिंह गुर्जर ने बताया साल 2023 में बाँस भिर्रा सफाई कार्य किया गया था। जिसमें वास्तविक संख्या से कई गुना संख्या बताकर करीब 21लाख रुपए निकाले गए। जबकि बाँस भिर्रा की उतनी संख्या उस क्षेत्र में नहीं है। कार्य को सत्यापित करने वाले तत्कालीन उपवन मंडलाधिकारी, वन परिक्षेत्र अधिकारी, वनपाल और वनरक्षक के खिलाफ कार्रवाई होगी। इनमें से कुछ के खिलाफ आरोप पत्र बन गए है। बाकी को भी जारी किए जाएंगे। जिसके बाद वैधानिक कार्रवाई होगी। रेंजर वंदना मेहतो को हटाने के बाद वन मंडलाधिकारी कार्यालय में अटैच किया गया था। इस बीच रेंजर अवकाश पर चली गईं थीं। इस संबंध में उनसे बात करने के लिए काल किया। लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। वहीं डिप्टी रेंजर रहे बीएल अहिरवार का कहना है कि कोई घोटाला या भ्रष्टाचार नहीं किया गया है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में ही सब काम हुए। दो बार जांचे भी हो चुकी है। जबरजस्ती दोषारोपण किया जा रहा है। हम क्यों भ्रष्टाचार करेंगे।

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