भास्कर न्यूज| जैसलमेर राजस्थान कांग्रेस सेवादल के अध्यक्ष हेमसिंह शेखावत के निर्देश पर जैसलमेर कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष प्रदीपसिंह महेचा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं द्वारा कलेक्टर के नाम एडीएम को ज्ञापन सौंपा गया। सेवादल जिलाध्यक्ष महेचा ने बताया कि दुनिया की प्राचीनतम पर्वत श्रृंखलाओं में से एक और भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रंखला अरावली आज खतरे में है और उसका कारण है केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अरावली को लेकर पेश एक रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट की वजह से अरावली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा अब पहाड़ की श्रेणी से बाहर हो जाएगा। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अगुवाई में गठित कमेटी द्वारा पेश एक रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की नई परिभाषा को मंजूरी दी है। जिसमें कहा गया है कि 100 मीटर से कम ऊंचाई के पहाड़ों को अरावली का हिस्सा नहीं माना जाएगा। उन्होंने बताया कि इस कमेटी में भाजपा शासित चारों राज्य दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान तथा गुजरात के वन विभाग के सचिव हैं। अकेले राजस्थान में अरावली का 80 प्रतिशत हिस्सा आता है। यह साफ दर्शाता है कि सरकार की मंशा इस रिपोर्ट की आड़ में अरावली क्षेत्र में खनन शुरू करने की है। महेचा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई अरावली बचाने के लिए शुरू हुई। लेकिन केंद्र सरकार की रिपोर्ट ने अरावली के 90 प्रतिशत हिस्से को ही तकनीकी रूप से बाहर कर दिया। थार के रेगिस्तान विस्तार को पूर्वी राजस्थान सहित दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र में बढ़ने से रोकने में अरावली का ही योगदान है। पम्मूमल, प्रेम कुमार भार्गव, नेमीचंद भार्गव, चनणाराम सांसी मौजूद रहे।


