गुमला जिले में कई जगह लगते हैं भव्य मेले, जुटती है लोगों की भीड़

भास्कर न्यूज | गुमला जनजातीय बहुल गुमला जिले में मकर संक्रांति मनाने की प्राचीन परंपरा है। इस अवसर पर जिले में कई स्थानों पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस बार 14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाना है। जिसे लेकर गुड़-चीनी व तिलकुट के सुगंध से पूरा गुमला महक उठा है। मकर संक्राति को लेकर सभी लोग तिलकुट, लड्डू व बादाम चक्की खरीदने में मशगूल है। शहर से लेकर गांव तक में सजे दुकानों में खरीदारी की जा रही है। पालकोट रोड स्थित हिन्दुस्तान डेयरी सह मिष्ठान भंडार के संचालक मनीष हिन्दुस्तान ने बताया कि तिल के दाम में वृद्धि होने के कारण इस बार तिलकूट महंगा हुआ है। तिलकूट 240 रुपए प्रति किलो से लेकर 360 रुपए प्रतिकिलो तक उपलब्ध है। इसके अलावा खोवा तिलकूट 500, तिलपट्टी 240 रुपए, गुड़ तिलकूट 360 रुपए, बादाम पट्टी 240 रुपए किलो की दर से बेची जा रही है। तिलकूट बनाने का काम नंवबर से आरंभ कर दिया जाता है, जो फरवरी माह तक चलता है। कारीगर गया से आते है। इधर मान्यता है कि इस दिन तिल का सेवन करने के अलावे दान-पुण्य भी करना चाहिए। हिन्दुओं के पवित्र त्योहारों में से एक त्योहार मकर संक्राति का भी होता है। जिसकी अपनी विशेषता है। इस दिन हिन्दू समाज के लोग अहले सुबह उठकर नदी व घरों में स्नान कर पूजा पाठ करते हुए चूड़ा-दही व तिलकुट का सेवन करते है। मकर संक्राति के बाद से खरमास भी समाप्त हो जाता है और मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते है। हर लोग शुभ कार्य मकर संक्राति के दिन से ही करना प्रांरभ कर देते है। लोकल कारीगरों से तिलकुट बनाने का कार्य किया जा रहा है : मनीष हिन्दुस्तान डेयरी एण्ड मिष्ठान भंडार के संचालक मनीष ने बताया कि इस बार वे स्वयं से तिलकुट बनवा रहे है। और इसके लिए लोकल स्तर के कारीगरों को लगाया गया है। लोकल स्तर पर जो बेहतर कार्य हो सकता है। वे बाहर के कारीगरों से संभव नही है। साथ ही कहा कि यहां के लोगो को रोजगार से जोड़ने का काम किया जा रहा है। तिल के प्रयोग से जीवन सुखमय रहता : आचार्य हरिशंकर मकर संक्रांति के बाबत शक्ति मंदिर के आचार्य हरि शंकर मिश्रा व बबलू मिश्रा ने बताया कि मकर संक्रांति का त्योहार इस बार 14 जनवरी को है। विशेषता है कि सूर्य का प्रवेश मकर राशि में होता है। मौसम में भी परिवर्तन होता है। इस दिन तिल का प्रयोग करना चाहिए। जिससे जीवन सुखमय रहता है। उन्होंने बताया कि तिल का प्रयोग भोजन, तिलदान, हवन पूजन आदि कार्यों में किया जाता है। इसके बाद से हिंदुओं का सारा दोष समाप्त हो जाता है और शुभ समय आता है।

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