आपने टीवी में कई ऐसे टॉक शो देखें होंगे, जहां लोग अपने दिल की बात साझा करते हैं। खुल कर अपनी बात रखते हैं। ऐसे शोज में बात करने से कई बार परेशानियों का समाधान भी मिलता है। आम लोग प्रशासन से खुल कर बात करें, अपनी परेशानी बताएं इसके लिए गढ़वा एसडीएम संजय कुमार ने टॉक शो के पैटर्न पर अनूठी पहल शुरू की है। उन्होंने ‘कॉफी विद एसडीएम’ नाम से कार्यक्रम की शुरुआत की है। वे हर बुधवार को कॉफी विद एसडीएम का कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इसमें एक समूह के लोगों को कॉफी पर बुलाते हैं। उनकी शिकायतें, समस्याएं और सुझाव सुनते हैं। फिर प्रशासनिक अफसरों के साथ मिलकर इन समस्याओं का समाधान करते हैं। पांच हफ्ते में 52 समस्याओं का निकला निदान गढ़वा एसडीएम संजय कुमार के ‘कॉफी विद एसडीएम’ कार्यक्रम को पांच हफ्ते पूरे हो गए हैं। इन पांच हफ्ते में वे 52 समस्याओं का निदान कर चुके हैं। इनमें वरिष्ठ नागरिक, किसान, व्यवसायी, थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे और ऑटो रिक्शा चालकों की समस्याएं शामिल हैं। आगे के कार्यक्रम में असंगठित क्षेत्र के मजदूर, प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे छात्र, समाचार पत्र विक्रेता, दिव्यांग, रक्तदाता, फुटपाथ विक्रेता और पंचायत प्रतिनिधियों को बुलाने की तैयारी है। क्या कहते हैं एसडीएम एसडीएम ने कहा कि इस कार्यक्रम से आमलोगों और प्रशासन के बीच संवाद बेहतर हुआ है। अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। इस कार्यक्रम में लोग अपने शहर को बेहतर बनाने के लिए खुलकर सुझाव दे रहे हें। अबतक के कार्यक्रम में क्या-क्या हुआ पहला हफ्ता: 11 दिसंबर को वरिष्ठजनों ने अतिक्रमण, स्वास्थ्य, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट को लेकर सुझाव दिए थे। कहा कि सरकारी ऑफिस में उन्हें तवज्जो नहीं दी जाती। बदलाव: पार्कों की टाइमिंग बदली गई। सफाई में तेजी आई। कर्मचारियों को हिदायत दी गई कि बुजुर्गों के साथ सौम्यता से पेश आएं। दूसरा हफ्ता: 18 दिसंबर को किसानों ने नीलगायों से खेती के नुकसान, धान की खरीद, बीज वितरण में गड़बड़ी और केसीसी आदि से जुड़े मुद्दों को उठाया। बदलाव: कृषि, सहकारिता के अधिकारियों को समस्याओं के निदान का निर्देश दिया गया। बैंकों को केसीसी की समस्या दूर करने को कहा गया। तीसरा हफ्ता: 25 दिसंबर को आए गढ़वा के व्यापारियों ने अतिक्रमण का विषय उठाया। उन्होंने गौशाला की जमीन के सीमांकन का आग्रह किया। बदलाव: दो सप्ताह तक अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया। गौशाला की भूमि के सीमांकन का आदेश दिया गया। चौथा हफ्ता : 1 जनवरी को ऑटो रिक्शा चालकों ने अवैध उगाही, टेंपो स्टैड पर अतिक्रमण जैसी समस्याएं बताईं। खुलकर अपनी बातें रखीं। बदलाव: ऑटो चालकों से अवैध उगाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। ऑटो स्टैंड के पास से अवैध गुमटियों को हटाया गया। पांचवां हफ्ता : 8 जनवरी को 50 थैलिसिमिया ग्रस्त बच्चों के पैरेंट्स ने अपनी पीड़ा रखी। उन्होंने कहा कि कैसे उन्हें खून के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। बदलाव : सिविल सर्जन, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक और अस्पताल प्रबंधक के साथ एसडीएम ने बैठक कर जरूरी निर्देश दिए। रक्त उपलब्धता के लिए अधिकारियों और डॉक्टरों का एक साझा व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया। ब्लड बैंक की औचक जांच शुरू हुई।


