शेयर बाजार में निवेश का झांसा देकर साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है। इस बार ठगों ने फर्जी फेसबुक पेज, व्हाट्सऐप ग्रुप, नकली ट्रेडिंग एप और जाली सेबी सर्टिफिकेट के जरिए एक रिटायर्ड अधिकारी को जाल में फंसाया। पीड़ित की पहचान एस. बंसल, रिटायर्ड डिप्टी जनरल मैनेजर (पंजाब) के रूप में हुई है। पीड़ित ने 7 लाख रुपए ठगी होने के मामले की शिकायत साइबर क्राइम से की है। पुलिस अनुसार मामला फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया से चल रहे संगठित साइबर फ्रॉड से जुड़ा है। अकाउंट्स, एप्लीकेशन और डिजिटल ट्रेल की जांच की जा रही है। पीड़ित एस. बंसल ने पुलिस को बताया, उनके एक पूर्व बॉस के नाम से फेसबुक पर एक फर्जी पेज बनाया गया था। उन्होंने उसे असली समझकर लाइक और कमेंट कर दिया। बाद में पता चला कि यह पेज येस सिक्युरिटीज के फर्जी नाम से चलाया जा रहा था। इसके बाद ठगों ने फेसबुक मैसेंजर से संपर्क कर बंसल को अपने वॉट्सऐप ग्रुप में जोड़ा। प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम पर आईपीओ में निवेश का धोखा ठगों ने ओकला कंपनी के आईपीओ में 308 रुपए प्रति शेयर के निवेश का प्रस्ताव दिया। न्यूनतम 5 लाख रुपए निवेश शर्त होने पर पीड़ित-उनके भाई ने 5 लाख रुपए बताए अकाउंट में जमा किए। इस राशि पर 1935 शेयर अलॉट करने की बात कहकर करीब 4 हजार शेयर दिखाए भी गए। रेफरल से जुड़े अन्य अकाउंट्स में भी 1-1 हजार शेयर दर्शाए गए। ठगी का शक होने पर जब पीड़ितों ने पैसे देने से इंकार किया, तो ठगों ने 50 हजार “सिक्योरिटी अमाउंट” मांगी। फीस अकाउंट से काटने व रकम लौटाने का कहने पर ठगों ने उनसे 10 लाख और मांगे। फ्रॉड में वह 7 लाख रु. गंवा चुके हैं। ठगों ने उनका लॉग-इन ब्लॉक कर दिया। बाद में सामने आया, जिस बैंक अकाउंट में पैसा जमा हुआ, वह म्यूल अकाउंट था। ठगों ने फर्जी सेबी सर्टिफिकेट भी भेजा। ओकला-येस सिक्युरिटीज जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम का दुरुपयोग किया गया। ठगों ने ब्लॉक ट्रेडिंग के नाम पर करवाया 7 बार निवेश ठगों ने पीड़ित को Omni Q.I.P नाम की एप्लीकेशन डाउनलोड करवाई और उस पर “ब्लॉक ट्रेडिंग” के नाम पर 7 अलग-अलग निवेश करवाया। शुरुआती मुनाफा दिखा कर भरोसा बनाया। रेफरल स्कीम का लालच दिया गया कि जो भी व्यक्ति उनके जरिए निवेश करेगा, उसे भी 2% अतिरिक्त लाभ मिलेगा। इसी लालच में बंसल ने अपने परिवार के तीन सदस्यों और एक साथी को भी साथ जोड़ा। मुकेश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट भास्कर एक्सक्लूसिव {कोई वैध निवेश कंपनी या ब्रोकरेज हाउस अलग पैसे नहीं मांगता। {सोशल मीडिया, फेसबुक पेज या व्हाट्सऐप ग्रुप के निवेश ऑफर पर भरोसा न करें, चाहे किसी कंपनी का क्यों न हो। {निवेश से पहले संबंधित कंपनी, प्लेटफॉर्म को SEBI की आधिकारिक वेबसाइट से वेरिफाई करें। {अनजान ऐप-लिंक डाउनलोड करने से पहले उसके डेवलपर, रिव्यू और रजिस्ट्रेशन जांचें। {ज्यादा मुनाफे, गारंटेड रिटर्न या रेफरल बोनस का लालच साइबर ठग देते हैं।


