भास्कर न्यूज | कुस्तला कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा ग्राम कुस्तला में कृषकों के खेतों पर सरसों की उन्नत किस्मों के मूल्यांकन परीक्षण का आयोजन किया जा रहा है। केंद्र की शस्य वैज्ञानिक डॉ. नूपुर शर्मा ने बताया कि एग्रीकल्चर स्टैटिस्टिक्स एट ए ग्लांस (राज्य) 2022–23 के अनुसार जिले में रबी मौसम में सरसों की खेती लगभग 1,81,357 हेक्टेयर क्षेत्रफल में की जाती है। ऐसे में जिले में सरसों की उन्नत किस्मों को शामिल कर कृषकों तक उनकी तकनीक पहुँचाना उत्पादकता बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। डॉ. शर्मा ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को देखते हुए इस वर्ष अनेक कृषक सरसों की बुवाई समय पर नहीं कर पाए तथा कई स्थानों पर बुवाई के बाद भी अंकुरण में समस्याएं देखने को मिलीं। इसी को ध्यान में रखते हुए जलवायु अनुकूल सरसों की उन्नत किस्मों का चयन कर जिले में उनका मूल्यांकन किया जा रहा है। इस परीक्षण के अंतर्गत सरसों की कुल छह किस्मों NRCHB-101, राधिका, गिरिराज, BPM-11, BPM-1825 तथा निजी क्षेत्र की किस्मों का मूल्यांकन किया जाएगा। इन किस्मों की उत्पादकता एवं अन्य महत्वपूर्ण सूचकांकों के आधार पर यह परीक्षण जिले के 10 चयनित कृषकों के खेतों पर आयोजित किया गया है। शस्य वैज्ञानिक डॉ. नूपुर शर्मा ने बताया कि BPM-11 एवं BPM-1825 किस्में भारतीय सरसों अनुसंधान परिषद, भरतपुर द्वारा विकसित की गई हैं। BPM-11 किस्म वर्ष 2024 में विकसित की गई है, जिसकी औसत उपज 1859 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। यह किस्म लगभग 123 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसमें औसतन 37.8 प्रतिशत तेल पाया जाता है तथा यह देरी से बुवाई के लिए उपयुक्त एवं सफेद रोली रोग के प्रति सहनशील है। इसी प्रकार BPM-1825 किस्म वर्ष 2025 में विकसित की गई है, जो 133–137 दिनों में पककर तैयार होती है। इसमें औसतन 41.7 प्रतिशत तेल की मात्रा पाई जाती है तथा इसकी औसत उपज 26.30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह किस्म समय पर बुवाई के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती है। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. बी. एल. मीणा ने बताया कि सरसों की इन उन्नत किस्मों का यह मूल्यांकन कृषकों की आवश्यकता एवं जिले की मांग को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य अधिक उत्पादक एवं उन्नत किस्मों को कृषकों तक पहुंचाकर जिले में सरसों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि करना है। कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं फील्ड को सुव्यवस्थित रूप से संचालित करने में केंद्र के तिलहन प्रौद्योगिकी अभिकर्ता (टेक्नोलॉजी एजेंट) सुनील मीणा का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। वहीं, केंद्र के चालक शकील अहमद द्वारा फील्ड विजिट के दौरान परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित की गई।


