ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अविनाश तिवारी, गोविंद गुरु ट्राइबल यूनिवर्सिटी बांसवाड़ा राजस्थान डॉ. केएस ठाकुर सहित 18 प्रोफेसर व स्टाफ पर ईओडब्ल्यू ने अपराध दर्ज किया है। इनमें से 2 प्रोफेसर की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 6 रिटायर्ड हो चुके हैं। साल 2022 में आवेदक अरुण कुमार शर्मा निवासी दुर्गा कालोनी मुरार ग्वालियर के द्वारा संचालक शिवशक्ति महाविद्यालय गांव झुण्डपुरा तहसील सबलगढ़ मुरैना के खिलाफ फर्जी रूप से कॉलेज संचालित करने का आरोप लगाते हुए एक शिकायत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में की थी। जिसकी जांच ईओडब्ल्यू ग्वालियर द्वारा की गई। जांच के बाद मिले साक्ष्यों के आधार पर पाया गया कि शिवशक्ति महाविद्यालय सिर्फ कागजों में दर्ज है, लेकिन जो एड्रेस उसका डॉक्यूमेंट में दर्शाया गया है। वहां उसकी कोई उपस्थिति नहीं मिली है। जिसके बाद मामला दर्ज कर अब आगे कार्रवाई की जाएगी। मुरैना के सबलगढ़ स्थित झुण्डपुरा गांव स्थित शिवशक्ति महाविद्यालय के खिलाफ मुरार दुर्गा कॉलोनी निवासी अरुण कुमार ने शिकायत की थी। यह शिकायत साल 2022 में की गई थी। शिकायत में साफ रूप से कहा गया था कि इस नाम का कोई कॉलेज वास्तविकता में नहीं है। शिवशक्ति महाविद्यालय के संचालक रघुराज सिंह जादौन द्वारा अन्य आरोपियों के साथ मिलकर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए, जिसके आधार पर कॉलेज की मान्यता एवं संबद्धता प्राप्त कर छात्रों का फर्जी प्रवेश दिखाकर स्कॉलरशिप व अन्य मद के लाभ प्राप्त कर शासन को आर्थिक क्षति की गई है। इन आरोपों की जांच की तो ईओडब्ल्यू की टीम ने पाया कि जांच दल की साठगांठ से यह कॉलेज संचालित हो रहा था। जांच कमेटी के सदस्यों की भूमिका संदिग्ध, जिसमें कुलपति भी शामिल ईओडब्ल्यू ने जांच में पाया कि जीवाजी विश्वविद्लाय द्वारा महाविद्यालय के निरीक्षण के लिए प्रतिवर्ष गठित जांच कमेटी के सदस्य प्रोफेसर अविनाश तिवारी (वर्तमान में कुलपति), गोविंद गुरु ट्राइबल यूनिवर्सिटी बांसवाड़ा राजस्थान में कुलपति डॉ. केएस ठाकुर, डॉ. एपीएस चौहान (अब जीवित नहीं हैं), डॉ. एके हल्वे (रिटायर्ड), डॉ. एसके गुप्ता (रिटायर्ड), डॉ. एसके सिंह, डॉ. सीपी शिन्दे (रिटायर्ड), डॉ आरए शर्मा, , ज्योति प्रसाद (रिटायर्ड), डॉ. नवनीत गरूड, डॉ. सपन पटेल, डॉ. एसके द्विवेदी (रिटायर्ड), डॉ. हेमन्त शर्मा, डॉ. राधा तोमर, डॉ. आरपी पाण्डेय (रिटायर्ड), डॉ. एमके गुप्ता, डॉ. निमिषा जादौन, डॉ. सुरेश सचदेवा, डॉ. मीना श्रीवास्तव द्वारा लाभ पाने के लिए असत्य आधारों पर उक्त महाविद्यालय के कूटरचित निरीक्षण प्रतिवेदन तैयार कर इस महाविद्यालय की संबद्धता लेने में सहयोग करने से इन व्यक्तियों के प्रथम दृष्टि में अपराध प्रमाणित पाया जाना दर्शित होता है।


