झारखंड में केजी से पीजी तक जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई के लिए पश्चिम बंगाल के अलावा छत्तीसगढ़ और ओडिशा मॉडल का भी अध्ययन होगा। शिक्षा विभाग की 7 सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी 16 जनवरी के बाद कोलकाता जाएगी। वहां से लौटने के बाद छत्तीसगढ़ और ओडिशा मॉडल का अध्ययन करने के लिए कमेटी इन दो राज्यों में भी जाएगी। जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं में झारखंड में किस प्रकार पढ़ाई की जाए, इसके बारे में शिक्षा विभाग रिपोर्ट तैयार कर रहा है। शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन का यह ड्रीम प्रोजेक्ट है। उनका कहना है कि सीएम ने उनकी इस योजना पर सहमति दी है। राज्य में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई सुदृढ़ करनी है। प्राइमरी से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई होगी। प्राथमिक कक्षाओं से ही जनजातीय भाषाओं की पढ़ाई शुरू होगी। पश्चिम बंगाल में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई प्राथमिक कक्षा से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक होती है। ऐसे में झारखंड सरकार इसी मॉडल को अपनाने पर उत्सुक है। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निर्णय लेने के पूर्व वे और भी राज्यों की शिक्षा व्यवस्था का अध्ययन कर लेना चाहते हैं, ताकि कोई कमी न रह पाए। दूसरे राज्यों के स्कूलों में क्षेत्रीय भाषा पढ़ाने की प्रक्रिया भी जानेगी कमेटी शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय कमेटी दूसरे राज्यों के स्कूलों में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा पढ़ाने की प्रक्रिया और पढ़ने वाले बच्चों के बारे में अध्ययन करेगी। वे वहां पर इन भाषाओं की पढ़ाई के तरीके, शिक्षकों की नियुक्ति, पाठ्यक्रम और पढ़ाई की प्रक्रिया का अध्ययन करेंगे। इसके लिए ये विभिन्न स्कूलों में जाकर जानकारी प्राप्त करेंगे। सरकार का उद्देश्य है कि झारखंड के बच्चे अपनी मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं में निपुण बनें। इससे न केवल उनकी पहचान सुदृढ़ होगी, वे अपने समाज और संस्कृति से गहरे जुड़े रहेंगे। प्राथमिक शिक्षा निदेशक बनाए गए उच्चस्तरीय कमेटी के अध्यक्ष प्राथमिक शिक्षा निदेशक शशि प्रकाश सिंह को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति के सदस्यों में शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव नंद किशोर लाल, झारखंड अधिविद्य परिषद (जैक) के सचिव जयंत कुमार मिश्र, जेईपीसी के प्रशासी पदाधिकारी सच्चिदानंद द्विवेंदु तिग्गा, जेईपीसी के गुणवत्ता शिक्षा प्रभारी अभिनव कुमार हैं। इनके अलावा शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा के दो शिक्षाविदों डॉ. रजनीकांत मार्डी और छोटा भुजंग टुडू को भी नामित किया है। इन बिंदुओं का भी होगा अध्ययन… जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के लिए योग्य शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया कैसी है {इन भाषाओं के लिए तैयार पाठ्यक्रम और उनके शिक्षण का तरीका क्या है {इन भाषाओं को पढ़ने वाले छात्रों की संख्या और उनकी रुचि किस प्रकार की है {इन भाषाओं की पढ़ाई का छात्रों और समाज पर क्या प्रभाव पड़ा है


