शहर के हाउसिंग बोर्ड में बुधवार को श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। यह यात्रा नागेश्वर महादेव मंदिर से आरंभ हुई। यात्रा से पूर्व महादेव मंदिर में विद्वान पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ कलश पूजन और भागवत जी का पूजन किया। इसके पश्चात पारंपरिक वस्त्रों में सजी मातृ शक्तियों ने सिर पर कलश धारण कर बैंड-बाजों के साथ कलश यात्रा कथा स्थल पर पहुंचीं। वहां पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रों के साथ भगवान गणेश जी का अर्चन कर भागवत जी को स्थापित किया गया। श्रीमद्भागवत कथा के मुख्य आयोजनकर्ता विजयलक्ष्मी दिनेश कुमार धाबाई, आदित्य, अंशु और प्रगति ने भागवत जी का पूजन किया। उन्होंने कथावाचक पंडित धीरज महाराज का माल्यार्पण कर उनका स्वागत किया। इस कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कथावाचक पंडित धीरज महाराज ने पहले दिन भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि जीव, जगत और जगदीश की कृति का नाम भागवत है। उन्होंने बताया कि जब पूरे जन्मों का पुण्य एकत्र होता है, तभी श्रीमद्भागवत कथा सुनने का अवसर प्राप्त होता है। पंडित धीरज महाराज ने आगे कहा कि इस कथा का मुख्य यजमान बनना और आयोजन कराने का अवसर भी कई जन्मों के पुण्य जागृत होने पर ही प्रभु की कृपा से प्राप्त होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व परमात्मा का परिचय जानना आवश्यक है, क्योंकि परमात्मा का स्वरूप अक्षर है। उन्होंने बताया कि यह परमहंसों की संहिता है और भागवत कथा हृदय को जागृत कर मुक्ति का मार्ग दिखाती है। इसलिए सात दिन तक चलने वाली इस पवित्र कथा को श्रवण करके अपने जीवन को सुधारने का मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। उन्होंने भागवत कथा को गंगा, यमुना, सरस्वती के संगम के समान बताया। उन्होंने कहा कि भागवतजी की रचना वेदव्यासजी ने की। इसमें 12 स्कंध हैं, जिसमें प्रभु के विभिन्न चरित्रों के वर्णन है। उन्होंने कहा कि भक्ति रूपी तत्व के जीवन में आने पर व्यक्ति का आत्मबल बढ़ने लगता है और प्रभु की कृपा होती है। इसलिए भक्ति करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भागवत मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान और सत्य की ओर ले जाने वाली है। इस अवसर पर नरेन्द्र ओझा, सुरेन्द्र त्रिवेदी, अंजू सक्सेना, विनोद कुंवर, मधुपरिहार, जमना परिहार, नंदाकंवर, पायल देवड़ा, मधुगर्ग, शालिनी वर्मा, रश्मि त्रिवेदी विजय शर्मा, रागीनी आर्चाय सहित कई श्रद्धालु उपस्थ्ति थे।


