उदयपुर विकास प्राधिकरण:तत्कालीन अफसरों ने भूमाफिया से की मिलीभगत, 100 करोड़ का नुकसान, मामला एसीबी में

उदयपुर विकास प्राधिकरण (पहले यूआईटी) के अफसरों और भूमाफिया में मिलीभगत सामने आई है। मामला एसीबी तक पहुंच गया है। भूमाफिया ने तत्कालीन अधिकारियों से मिलीभगत कर राजस्व ग्राम नला फला, वाडा और ढीकली में यूडीए की बेशकीमती जमीन ले ली। इसके बदले पहाड़ीनुमा जमीन देकर 100 करोड़ का नुकसान पहुंचाया। इतना ही नहीं, यूडीए ने भूमाफिया को इस जमीन पर टाउनशिप की स्वीकृति भी दे दी। तीन साल बाद इसका खुलासा होने पर जयपुर एसीबी मुख्यालय में इसका परिवाद दर्ज हुआ है। इसके बाद जांच उदयपुर की एसीबी स्पेशल यूनिट को सौंपी गई। यूनिट के एएसपी राजीव जोशी ने यूडीए कमिश्नर राहुल जैन से टाउनशिप योजना के दस्तावेज व रिकॉर्ड मांगे हैं। मामले में तत्कालीन सचिव, विशेषाधिकारी और उपनगर नियोजक के नाम सामने आए हैं। 2.37 लाख वर्गफीट जमीन दी, रिकाॅर्ड में सिर्फ 96 हजार यूआईटी से जमीन ग्रेस कॉलोनाइजर्स के जरिये शांतिलाल मेहता को दी गई थी। इसमें 1 लाख 41 हजार 600 वर्गफीट का एरिया नहीं जोड़ा गया। मेहता ने यूआईटी की 2 लाख 37 हजार 600 वर्गफीट जमीन ली, लेकिन प्लान में इसे 96 हजार हजार वर्गफीट ही बताया। इससे यूआईटी को 100 करोड़ का नुकसान हुआ। नालाफला की भूमि पर 17 अक्टूबर 2022 को यूआईटी ने दिए जवाब दिया। इसमें स्वीकार किया कि अब नियमन की अग्रिम कार्रवाई नहीं की जा रही है। उस समय ओएसडी सावन कुमार चायल ने साइन किए थे। स्टे होने के बाद भी जमीन के पट्‌टे जारी करवा दिए गए। इसके बाद हाईकोर्ट ने अंकित किया कि पट्‌टे कोर्ट के अधीन रहेंगे, लेकिन तत्कालीन सचिव ने शर्त को हटवा दिया। ऐसा करना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर था। जयपुर मुख्यालय से भेजे गए परिवाद में आरोप है कि गलत तरीके से यह काम तत्कालीन सचिव नितेंद्रपाल सिंह, तत्कालीन ओएसडी सावन कुमार चायल और डीटीपी ऋतु शर्मा ने किया। डवलपर-यूआईटी के बीच अदला-बदली, पर रिकॉर्ड में नहीं नला फला, वाडा और ढीकली में अलग-अलग आराजी नंबरों की जमीन मास्टर प्लान में हाईवे कंट्रोल बेल्ट और पौधरोपण के लिए है। यूआईटी ने 11 अक्टूबर 2022 को लेआउट प्लान इंटीग्रेटेड टाउनशिप के लिए स्वीकृत कर दिया। इस लेआउट में डवलपर और यूआईटी के बीच जमीन का आदान-प्रदान किया गया, लेकिन रिकॉर्ड में इसकी एक्सचेंज डीडी पंजीकृत नहीं है। यूआईटी ने डवलपर को मौके की जमीन दी गई, जबकि यूआईटी ने मुख्य मार्ग से काफी पीछे पहाड़ीनुमा जमीन ले ली। यूआईटी ने जो जमीन दी, उसकी कीमत ज्यादा है, जबकि ली गई जमीन की काफी कम है। एसीबी ने यूडीए से टाउनशिप से संबंधित रिकॉर्ड मांगा

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *