झारखंड के तीन मेडिकल कॉलेज रांची के रिम्स, एसएनएमएमसीएच धनबाद और एमजीएम जमशेदपुर सहित कई जिला अस्पतालों में अब जांच महंगी होगी। क्योंकि पीपीपी मोड पर रेडियोलॉजी सेवा दे रही हेल्थ मैप डायग्नोस्टिक प्रा. लि. का राज्य सरकार के साथ करार खत्म हो चुका है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत 31 दिसंबर तक उसे अस्थाई अवधि विस्तार दिया गया था। इसके बाद इसे बंद करने का नोटिस जारी कर दिया है। ऐसे में मरीजों को निजी केंद्रों से जांच करानी होगी। रिम्स में हेल्थ मैप के माध्यम से एक्स-रे, अल्ट्रासोनोग्राफी, एमआरआई और सीटी स्कैन समेत अन्य रेडियोलॉजिकल जांच होती है। सरकारी एमओयू के तहत हेल्थ मैप में सीजीएचएस के निर्धारित दर पर जांच सुविधा उपलब्ध कराई जा जाती है। यह दर निजी रेडियोलॉजी सेंटर की तुलना में 40 से 50 प्रतिशत तक सस्ती होती है। ऐसे में रिम्स आने वाले मरीजों को 31 दिसंबर के बाद जांच के लिए महंगे शुल्क चुकाने होंगे। बता दें कि रिम्स में रोजाना 60 से ज्यादा मरीजों की सीटी स्कैन व एमआरआई जांच होती है। इनमें ट्रॉमा, ब्रेन स्ट्रोक, एक्सीडेंट, न्यूरो और इमरजेंसी केस शामिल रहते हैं। हेल्थमैप का सेंटर बंद होने का सीधा असर गरीब मरीजों पर पड़ेगा। हालांकि इसे सेवा विस्तार देने पर भी चर्चा चल रही है। लेकिन यह तय नहीं है कि आखिरकार इस मामले में क्या फैसला होगा। 113 करोड़ रु. से अधिक की जांच की स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, हेल्थमैप ने पिछले 10 वर्षों में राज्यभर में जांच सेवाओं के एवज में 113 करोड़ 74 लाख रुपये से अधिक की राशि प्राप्त की है। इसमें एपीएल मरीजों से 69.86 करोड़ रुपये, बीपीएल और जेएसएसके मरीजों की जांच के बदले सरकारी भुगतान 43.87 करोड़ रुपये शामिल हैं। इन अस्पतालों पर भी पड़ेगा असर हेल्थ मैप तीन मेडिकल कॉलेजों के अलावा देवघर, खूंटी, गिरिडीह, जामताड़ा, गोड्डा, साहिबगंज, सरायकेला और पाकुड़ के सदर अस्पताल में भी जांच केंद्र चला रहा है। हालांकि इन अस्पतालों में मरीजों का दबाव रिम्स की तुलना में कम है, लेकिन सेवा बंद होने से वहां भी जांच प्रभावित होगी। प्रोक्योरमेंट कॉर्पोरेशन ने कंसेशन फीस नहीं चुकाने का लगाया है आरोप झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने हेल्थमैप पर कंसेशन फीस नहीं चुकाने का गंभीर आरोप लगाया है। कॉर्पोरेशन के अनुसार, 16 नवंबर 2015 को हेल्थमैप के साथ 10 वर्षों के लिए एमओयू साइन किया गया था, जिसकी अवधि 15 नवंबर 2025 को पूरी हो चुकी है। एमओयू के तहत कंपनी को हर वर्ष प्रीमियम कंसेशन फीस जमा करनी थी, लेकिन 10 वर्षों में कंपनी ने 11.37 लाख रुपए ही जमा किए। रिम्स में हेल्थमैप का ढाई करोड़ से अधिक बकाया राज्य में हेल्थ मैप का 4 करोड़ से अधिक का बकाया है। केवल रिम्स में करीब ढाई करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान लंबित है। अस्पताल प्रबंधन ने कंपनी के जमा किए गए बिलों का विस्तृत सत्यापन कराया है, लेकिन इसके बावजूद अब तक भुगतान नहीं हो सका है। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसके बावजूद भुगतान फंसा हुआ है। इसी वजह से पूर्व में बीपीएल और जेएसएसके मरीजों की मुफ्त जांच सेवा भी प्रभावित हो चुकी है।


