कोटा में मुर्दा मवेशियों को फेंकने का विवाद अब और गहराता जा रहा है। अभी तक भी शहर से मुर्दा मवेशी नहीं उठ रहे है। हालांकि निगम की गोशाला से जैसे तैसे इन्हें उठवाया जा रहा है लेकिन शहर के पशु चिकित्सालय से अभी तक मुर्दा मवेशी नहीं उठ रहे है। अस्पताल परिसर में पड़े मृत पशुओं से उठ रही दुर्गंध के कारण न सिर्फ इलाज का काम प्रभावित हो रहा है, बल्कि चिकित्सक, स्टाफ और पशुपालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में पशुपालक अपने बीमार मवेशियों को इलाज के लिए लेकर पहुंचते हैं, लेकिन परिसर में फैली बदबू के चलते वहां रुकना तक मुश्किल हो गया है। डॉ.भंवर सिंह ने बताया कि पिछले चार पांच दिन से मवेशियों को नहीं उठाया जा रहा है। हमने अपने स्तर पर भी कोशिश की लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। स्थिति यह है कि हमारे यहां काम करने वाले स्टाफ को वॉमिटिंग तक हो रही है। बदबू इतनी तेज है कि अस्पताल में काम करना मुश्किल होता जा रहा है। मृत मवेशियों से निकलने वाली दुर्गंध में अमोनिया और सड़ांध की गैसें होती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। साथ ही साथ दूसरे पशुओं में संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी हुई है। मृत पशुओं के लंबे समय तक पड़े रहने से बैक्टीरिया और कीटाणुओं के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। इससे न सिर्फ अस्पताल परिसर अस्वच्छ हो रहा है, बल्कि अन्य बीमार पशुओं में संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी हुई है। गौरतलब है कि आंवली में मुर्दा मवेशियों को फैंकने को लेकर विवाद चल रहा है। ठेकेदार की गाडी में तोडफ़ोड़ कर दी गई थी, जिसके बाद से शहर से मवेशियों को उठाने का काम बंद पड़ा हुआ है।


