मध्य प्रदेश सरकार ने नर्मदापुरम के तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और वर्तमान में बुरहानपुर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप मोजेस के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार ने न्यायालय में अभियोजन चलाने की स्वीकृति दे दी है। यह आदेश 15 दिसंबर को जारी किया गया था, जो अब सामने आया है। मप्र सरकार के अवर सचिव सीमा डेहरिया की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि विशेष स्थापना लोकायुक्त कार्यालय, भोपाल के पत्र के आधार पर डॉ. प्रदीप मोजेस के खिलाफ अभियोजन स्वीकृत किया गया है। आदेश में उल्लेख है कि प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ अपराध प्रमाणित पाए गए हैं। डॉ. मोजेस पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 12, 13(1)(बी), 13(2) (संशोधन 2018) और धारा 120-बी भादंवि के तहत अभियोजन की अनुमति दी गई है। इसके लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 218 के तहत स्वीकृति प्रदान की गई। क्या है पूरा रिश्वत मामला लोकायुक्त जांच के अनुसार, आरोपी डॉ. प्रदीप मोजेस और एक महिला संविदा लेखा प्रबंधक ने पद का दुरुपयोग करते हुए सीएमएचओ कार्यालय नर्मदापुरम में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 मदनमोहन वर्मा से बिल भुगतान के एवज में रिश्वत की मांग की थी। 29 अप्रैल 2022 को रिश्वत मांगी गई थी। इसके बाद 2 मई 2022 को डॉ. प्रदीप मोजेस ने 2 हजार रुपए और महिला लेखा प्रबंधक ने 3 हजार रुपए टेबल पर रखवाए, जहां लोकायुक्त टीम ने दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया था। राज्य स्तरीय समिति ने की थी अनुशंसा संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं स्तर पर गठित राज्य स्तरीय समिति की 10 नवंबर 2025 को हुई बैठक में इस प्रकरण में अभियोजन स्वीकृति की अनुशंसा की गई थी। उसी आधार पर सरकार ने अब मंजूरी प्रदान की है। सीएमएचओ से सिविल सर्जन तक का पद डॉ. प्रदीप मोजेस नर्मदापुरम में सीएमएचओ पद पर पदस्थ थे, जबकि वर्तमान में वे बुरहानपुर जिला अस्पताल में सिविल सर्जन हैं। स्वास्थ्य विभाग में सीएमएचओ का पद सिविल सर्जन से वरिष्ठ माना जाता है। इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप मोजेस से पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं किया।


