भास्कर न्यूज | सोनहत शासकीय नवीन महाविद्यालय सोनहत में बुधवार को छत्तीसगढ़ माटी पुत्र हिंदी साहित्य के शिखर पुरुष विनोद कुमार शुक्ल के निधन में 2 मिनट का सामूहिक मौन धारण किया गया। छात्र-छात्राओं को हिंदी के व्याख्याता पुष्प करन सांधे ने शुक्ल के जीवन वृत्त व कृतित्व के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सम्मानों की लंबी सूची उनके कद की गवाही देता है। साहित्य अकादमी पुरस्कार मुक्तिबोध फैलोशिप, रजा पुरस्कार पैन नाबोंकोब पुरस्कार 2023 और अंततः ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया। वह पाठक की चुप सहमति और संवेदना से पहचाने जाते रहे। विनोद कुमार शुक्ला का जाना सिर्फ एक लेखक का जाना नहीं, यह उस भाषा का मौन है, जो बहुत धीरे बोलती थी, लेकिन भीतर तक उतर जाती थी। साहित्य आज थोड़ा और अकेला हो गया है। महाविद्यालय के शैक्षणिक स्टाफ प्राचार्य शैलेश मिश्रा, डॉक्टर अविनाश परीडा, वरिष्ठ प्राध्यापक, आरएस खांडे समाजशास्त्र, सैयदा जेबा बख्तियार, सेबुन निशा, कविता व सभी छात्र शामिल हुए।


