सत्तन बोले- अटल जी ने नई पीढ़ी को रास्ता दिखाया:सुशासन सम्मेलन में महापौर ने कहा- अटल जी के विचार पर हम काम करें, यही सुशासन

नगर निगम मुख्यालय के अटल परिषद सभागृह में सुशासन सम्मेलन का आयोजन किया गया। आयोजन पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न, अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के अवसर पर हुआ। आयोजन में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, कवि सत्यनारायण सत्तन, वरिष्ठ नारायण केसरी, बाबू सिंह रघुवंशी, मध्य प्रदेश कर्मचारी आयोग अध्यक्ष प्रताप करोसिया, सभापति मुन्नालाल यादव, भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, रघुवीर पटेल, समस्त महापौर परिषद सदस्य व अन्य उपस्थित रहे। कवि सत्यनारायण सत्तन ने कहा कि महापौर के प्रयास से इंदौर शहर के इस शानदार सभागृह का नामकरण भी अटल सदन रखा गया है यह एक अनुकरणीय काम है। ‌ यह शताब्दी अटल जी को समर्पित हुए हम सब अटल जी के विचारों का अनुसरण करें। परमार्थ, रीति, नीति, दया, सोच और अन्य संपूर्ण गुणों के पदार्थ से जो मिश्रण निकलता है वह अटल बिहारी वाजपेयी जी हैं। अटल जी, जिन्होंने देश और विदेश में हमारा सम्मान बढ़ाया और नई पीढ़ी के लिए रास्ता दिखाया। अटल जी के विचारों से प्रेरणा मिलती है
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि अटल जी के विचार ही सर्वमान्य है, उनके विचारों से हमें प्रेरणा मिलती है, विश्व पटेल पर हिंदी का मान बढ़ाया है और बेहतर शासन करके सुशासन का उदाहरण दिया है, उनके विचार पर हम सभी काम करें यही सुशासन है। ऐसे महापुरुष के जन्म दिवस के अवसर पर आज निगम द्वारा विशेष एम आई सी बैठक आयोजित की जिसमें इंदौर के मध्य स्थित आगरा मुंबई मार्ग का नामकरण अटल बिहारी वाजपेई मार्ग करने का प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही नगर निगम इंदौर के निगम परिषद सभागृह का नाम भी अटल सदन रखा गया और इंदौर के मध्य क्षेत्र अन्नपूर्णा से लेकर सुदामा नगर की लिंक रोड का नामकरण एवं उक्त मार्ग पर 25 फीट ऊंचाई की अटल जी की प्रतिमा स्थापित करने का काम किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्व. अटल जी के आदर्शों, विचारों एवं उनके द्वारा स्थापित सुशासन की अवधारणा को स्मरण करते हुए जनप्रतिनिधियों एवं लोगों को प्रेरित करना है। अटल जी ने अपने सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रहित, लोकतांत्रिक मूल्यों, सुशासन एवं विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, जो आज भी देश के लिए मार्गदर्शक हैं। कार्यक्रम का संचालन सचेतक कमल वाघेला ने किया एवं आभार स्वास्थ्य प्रभारी अश्विनी शुक्ल ने माना।

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