केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार, 25 दिसंबर को एक दिवसीय प्रवास पर रीवा पहुंचे। उन्होंने बसामन मामा गोधाम पहुंचकर प्राकृतिक खेती और गौ-संरक्षण के अनूठे मॉडल का अवलोकन किया। अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने उन्हें बसामन मामा गोधाम के बारे में बताया था और तभी उन्होंने यहां आने का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की जयंती है और अटल जी को रीवा बेहद प्रिय था। वे बघेली बोली से गहरा लगाव रखते थे और जो कहते थे, उसे करके दिखाते थे। प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की उन्होंने कहा कि रीवा में एशिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट है और बसामन मामा गोधाम प्राकृतिक खेती का बेहतरीन उदाहरण है। यहां गाय के गोबर से खेती की जा रही है, जिसमें दलहन, चावल, चना, सरसों जैसी फसलें उगाई जा रही हैं। यदि इसे प्रकल्प के रूप में आगे बढ़ाया जाए तो विंध्य क्षेत्र के किसानों की आय में बड़ा इजाफा हो सकता है। अमित शाह ने कहा कि एक देशी गाय से 21 एकड़ तक बिना रासायनिक खाद के खेती संभव है। केमिकल फर्टिलाइजर से बीपी, शुगर जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। प्राकृतिक खेती न केवल जमीन, बल्कि इंसान की सेहत के लिए भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि देश में 40 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं और उन्होंने खुद भी अपने खेत में इसका प्रयोग किया है। अंत में उन्होंने कहा कि धरती को मां कहते हैं, उसे कंक्रीट जैसा बनाना ठीक नहीं है। पीपल के वृक्ष का विशेष महत्व बताते हुए उन्होंने सभी से कम से कम 5 पीपल के पेड़ लगाने और प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लेने की अपील की। 52 एकड़ में 9 हजार गायें, गोबर से बन रहा पेंट-फिनाइल 52 एकड़ में फैला बसामन मामा गौ-अभ्यारण्य अब केवल गायों के रहने की जगह नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन गया है। यहां इस वक्त 9 हजार से ज्यादा बेसहारा और बीमार गायों की सेवा 100 से अधिक कर्मचारी कर रहे हैं। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि गौशाला से निकलने वाले गोबर और गोमूत्र से यहां जैविक खाद, गो-काष्ठ (लकड़ी का विकल्प) और गोनाइल (फिनाइल) जैसे उत्पाद बनाए जा रहे हैं। इसे आर्ट ऑफ लिविंग और स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से चलाया जा रहा है। केमिकल छोड़ 5 हजार किसान जुड़े इस अभ्यारण्य से प्रेरणा लेकर आसपास के 50 गांवों के करीब 5 हजार किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक एकड़–एक मौसम’ मंत्र को अपनाते हुए ये किसान अब अपनी फसलों में केमिकल नहीं डाल रहे हैं। इससे लोगों को पौष्टिक अनाज मिल रहा है और जमीन की सेहत भी सुधर रही है। पीपल के लिए जान देने वाले लोक देवता का स्थान बसामन मामा का स्थान विंध्य के लोगों की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि बसामन मामा ने पीपल के वृक्ष को कटने से बचाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। टमस नदी के किनारे पुरवा में बना यह धाम उसी त्याग की निशानी है। आज गृह मंत्री इसी पावन भूमि से देश को प्राकृतिक खेती का संदेश देंगे। देखिए तस्वीरें…


