भास्कर न्यूज़ | लुधियाना गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी द्वारा दो सप्ताह का डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम को जबरदस्त प्रतिसाद मिला, जिसमें पंजाब के विभिन्न जिलों से कुल 41 प्रतिभागियों (40 पुरुष और 1 महिला) ने भाग लिया। यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. जे.पी.एस. गिल ने वेटरनरी एक्सटेंशन एजुकेशन विभाग को सुव्यवस्थित प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सराहा। उन्होंने कहा कि डेयरी फार्मिंग पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है और इसमें स्वरोजगार, उद्यमिता और सतत आय सृजन की अपार संभावनाएं हैं, विशेषकर ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए। एक्सटेंशन एजुकेशन के निदेशक डॉ. आर.एस. ग्रेवाल ने कहा कि डेयरी न केवल घरेलू पोषण सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देती है, बल्कि रोजगार सृजन और ग्रामीण आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने मूल्य संवर्धन के माध्यम से विविधीकृत दुग्ध और डेयरी उत्पादों को बढ़ावा देने पर बल दिया, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। कोर्स डायरेक्टर डॉ. जसविंदर सिंह ने कार्यक्रम के व्यापक और व्यवहारिक पाठ्यक्रम की जानकारी दी, जिसमें सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण का समावेश किया गया। प्रशिक्षण में वैज्ञानिक पशु आवास प्रणाली, संतुलित आहार निर्माण, मैस्टाइटिस की रोकथाम व नियंत्रण, टीकाकरण कार्यक्रम, स्वच्छ दूध उत्पादन, प्रजनन स्वास्थ्य प्रबंधन, बायोसिक्योरिटी उपाय और दूध व मूल्यवर्धित उत्पादों के विपणन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान गुरनाम सिंह द्वारा पशुपालन उद्यमों के लिए वित्तीय सहायता योजनाओं और संस्थागत ऋण सुविधाओं पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। वहीं, डेयरी विकास विभाग, पंजाब की डेयरी विकास निरीक्षक डॉ. प्रिया बहरी ने विभागीय पहलों और चल रही योजनाओं की जानकारी दी। समापन सत्र को क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, तलवाड़ा के निदेशक डॉ. आर.के. शर्मा ने संबोधित किया। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. रवदीप सिंह और डॉ. प्रतीक सिंह धालीवाल ने छात्र समन्वयक डॉ. सिमरनपाल सिंह सेखों के साथ मिलकर किया।


