मकर संक्रांति पर गंगा नदी या किसी पवित्र नदी में स्नान करके जरूरतमंदों को दान देना शुभ फलदायी माना जाता है। रांची में भी हजारों श्रद्धालु विभिन्न नदियों पर जाकर स्नान-ध्यान करना चाहते हैं, लेकिन शहर में एक भी नदी ऐसी नहीं बची, जहां स्नान योग्य पानी है। कभी स्वर्णरेखा के केतारी बागान, नामकुम तट पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता था। मकर संक्रांति के दिन 50 हजार से अधिक श्रद्धालु नदी में डुबकी लगाकर दान करते थे। लेकिन अब स्वर्णरेखा नदी आज इतनी मैली हो गई है कि मकर संक्रांति पर श्रद्धालु डुबकी भी नहीं लगा सकते। क्योंकि, स्वर्णरेखा में अब साफ पानी के बजाय फैक्ट्री व नाले का गंदा पानी भरा है। दरअसल, कभी सोना उगलने वाली स्वर्णरेखा नदी को संवारने की योजना पिछले एक दशक से बन रही है। स्वर्णरेखा को गुजरात में स्थित साबरमती रिवर फ्रंट की तरह विकसित करने की योजना पिछले 10 वर्षों से बन रही है। इतने वर्षों में छह बार स्वर्णरेखा नदी को संवारने की योजना बनी, लेकिन यह सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई। अहमदाबाद की कंपनी एचसीपी डिजायन एंड कंसल्टेंट ने वर्ष 2016 में नदी के 18 किलोमीटर क्षेत्र का सर्वे करके रिपोर्ट तैयार की थी। लेकिन सरकार के सभी प्लान कागज पर ही बने रह गए। कब-कब बनी संवारने की योजना 100 मीटर चौड़ी नदी बनाकर संवारने की तैयारी धरी रह गई नगर विकास विभाग ने स्वर्णरेखा नदी की चौड़ाई को 100 मीटर करके उसे रिवर फ्रंट के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी। तत्कालीन नगर विकास सचिव अरुण कुमार सिंह ने नदी का सौंदर्यीकरण तीन जोन में बांटकर करने का निर्देश दिया था। पहले फेज में धुर्वा, हटिया, कुसई से चुटिया तक कुल 18 किलोमीटर नदी क्षेत्र का जीर्णोद्धार होना था। दूसरे फेज में लगभग 7.5 किलोमीटर और तीसरे फेज में लगभग 12 किलोमीटर क्षेत्र में काम होना था। बारिश का पानी जमा करने के लिए स्ट्रॉम वाटर ड्रेनेज सिस्टम बनाने का निर्देश जुडको को दिया था, लेकिन जुडको ने सर्वे कराकर इस योजना को डंप कर दिया। पर्यावरणविद् नीतीश प्रियदर्शी ने कहा कि स्वर्णरेखा को बचाना सबसे जरुरी है। क्योंकि, नदी नहीं बची तो आने वाले समय में चुटिया, डोरंडा, तुपुदाना, धुर्वा क्षेत्र में पीने तक के लिए पानी मिलना मुश्किल होगा। सर्वे रिपोर्ट में खुलासा… नदी का स्वरूप ही नहीं, नाले में तब्दील हो गई स्वर्णरेखा नगर विकास विभाग के निर्देश पर स्वर्णरेखा नदी के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए वर्ष 2015 में अहमदाबाद की एचसीपी कंपनी को जिम्मेदारी दी गई थी। कंपनी द्वारा जुलाई 2016 में स्वर्णरेखा नदी के 18 किलोमीटर क्षेत्र का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की गई। सर्वे रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि स्वर्णरेखा नदी का स्वरूप ही नहीं बचा है। नामकुम से चुटिया तक नदी क्षेत्र में कहीं 10 तो कहीं 20 फीट के दायरे में गंदा पानी बहते पाया गया। नदी में करीब दो दर्जन छोटे-बड़े नाले का गंदा पानी सीधे गिर रहा है। नामकुम में स्वर्णरेखा में मिल रही हरमू नदी भी दूषित है। तुपुदाना, हटिया क्षेत्र में नदी के दोनों किनारे अतिक्रमण किया गया है। राइस मिल की गंदगी भी सीधे नदी में आ रही है। स्वर्णरेखा के लिए तैयार होगा मास्टर प्लान स्वर्णरेखा नदी को बचाने के लिए जल्द ही मास्टर प्लान तैयार होगा। इससे संबंधित निर्देश दिए गए हैं। नदी के कैचमेंट क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा। नदी में गिरने वाले सभी नालों के गंदे पानी को एसटीपी में रिसाइकिल कर नदी में छोड़ा जाएगा। – सुनील कुमार, सचिव, नगर विकास


