रिम्स की सेंट्रल इमरजेंसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है। इसे खुद इलाज की जरूरत है। यहां हर समय गंभीर से गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं, लेकिन व्यवस्था के कारण उन्हें बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा। सेंट्रल इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों की मिनट-टू-मिनट स्थिति की मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है। इसके लिए रोगी का ऑक्सीजन लेवल, ब्लड प्रेशर, पल्स रेट और हार्ट रेट आदि पर लगातार नजर रखी जाती है। यदि स्थिति बिगड़ रही हो तो इन चीजों से मरीज की प्रारंभिक स्थिति का जल्द पता चल जाता है। लेकिन स्थिति यह है कि रिम्स की इमरजेंसी में लगे 29 मॉनिटर में 27 सोमवार को बंद पड़े थे। जबकि इन सारे बेड पर गंभीर मरीज इलाजरत हैं। दो बेड पर मॉनिटर चालू हालत में दिखे। इमरजेंसी में काम करने वाले कर्मी से पूछने पर बताया गया कि 29 में 25 के करीब मॉनिटर ठीक हैं। लेकिन मॉनिटर में लगने वाले एक्सेसरीज खराब हैं। इन एसेसरीज में ईसीजी वायर, ऑक्सीमीटर और वायर, बीपी वायर आदि शामिल हैं। कर्मी ने कहा कि इमरजेंसी के डॉक्टरों ने एसेसरीज की खराबी के बारे में कई बार प्रबंधन को सूचना दी है, लेकिन अबतक नए एक्सेसरीज की खरीद नहीं हुई है। इसी कारण सभी मॉनिटर बंद पड़े हुए हैं। डॉक्टर ने कहा एक माह से हो रही एसेसरीज की मांग इमरजेंसी में कार्यरत ड्यूटी डॉक्टर ने बताया कि मॉनिटर की एक्सेसरीज लंबे समय से खराब हैं। पिछले करीब एक माह से प्रबंधन से एसेसरीज की मांग की जा रही है। लेकिन अबतक इमरजेंसी को सामान उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। डॉक्टरों ने कहा कि सामान नहीं रहने के कारण मरीज की स्थिति का सही से आकलन करने में परेशानी होती है। चूंकि एक मरीज गंभीर स्थिति में करीब 2 से 4 दिन तक इमरजेंसी में ही भर्ती रहते हैं, ऐसे में स्थिति बिगड़ने पर भी समय पर पता नहीं चल पाता है। डॉक्टर ने छोटी मशीन लगा दी है, उससे ही होती है मॉनिटरिंग केस-1 इमरजेंसी में इलाजरत मरीज रोशन को भी सांस की समस्या है। तीन दिन पहले भर्ती हुआ है। रोशन का इलाज वेंटिलेटर सपोर्ट पर चल रहा है। जबकि उसके बेड के ऊपर लगा मॉनिटर बंद है। हालांकि रोशन के परिजनों ने बताया कि डॉक्टर ने छोटी मशीन लगा दी है। उस पर नजर रखनी पड़ती है। इससे ऑक्सीजन स्तर का पता चलता रहता है। मरीज को सांस की परेशानी, स्थिति बिगड़ने से पहले पता नहीं चलता केस-2 मरीज महेंद्र कुमार इमरजेंसी में इलाजरत हैं। पत्नी ने बताया कि सांस लेने में अचानक दिक्कत होने लगी। दो दिन पहले रिम्स में भर्ती किया। यहां वेंटिलेटर पर रखा गया है। अचानक मरीज की स्थिति बिगड़ने लगती है तो डॉक्टर छोटी मशीन लगाकर देखते हैं, तब पता चलता है कि ऑक्सीजन लेवल कम हो गया है। हमें डर लगा रहता है। नए मॉनिटर की खरीद के लिए प्रक्रिया चल रही सारे मॉनिटर 2019 में ट्रॉमा सेंटर के उद्घाटन के दौरान प्रबंधन को हैंडओवर किए गए थे, समस्या इसलिए आ रही है। सीएमसी सिर्फ एक साल के लिए वैध था। कुछ खराब एक्सेसरीज 2021 में प्रबंधन द्वारा रिप्लेस किए गए थे। नए मॉनिटर की खरीद के लिए प्रक्रिया भी लगभग फाइनल स्टेज में है। – डॉ. राजीव रंजन, पीआरओ, रिम्स


