NGT जस्टिस बोले-डिस्ट्रिक्ट एनवायरमेंट-प्लान में बेहद ज्यादा काम की जरूरत:खेजड़ी पेड़ को पर्यावणीय महत्व, विकास और पर्यावरण दोनों साथ चल सकता है

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के जस्टिस अफरोज अहमद आज दोपहर में बाड़मेर पहुंचे। जिला कलेक्ट्रेट कॉन्फ्रेंस हाल में अधिकारियों के साथ मीटिंग की। सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने जस्टिस के साथ अलग से चर्चा की। सांसद ने वेदांता कंपनी के क्रूड ऑयल खनन और जेएसडब्लू के कोयला खनन के दौरान निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को भूमि में दबाने से उत्पन्न गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करवाया। मीडिया बातचीत में न्यायमूर्ति ने कहा बाड़मेर प्रशासन को डिस्ट्रिक्ट एनवायरमेंट प्लान पर बेहद काम करने की जरूरत है। प्रशासन और पुलिस को लोगों को जागरूक करना पड़ेगा। वहीं खेजड़ी काटने के सवाल पर कहा कि खेजड़ी पर्यावरणीय के लिए बहुत ही जरूरी है। इसको बचाकर रखें। डिस्ट्रिक्ट एनवायरमेंट प्लान में काम करने की जरूरत, फिलहाल पाइप लाइन में है राष्ट्रीय हरित अधिकरण जो पर्यावरण का एक राष्ट्रीय कोर्ट है। उसका आदेश है कि हर जिले में डिस्ट्रिक्ट एनवायरमेंट प्लान बनाया जाए। जिसमें सॉलिड बेस, लिक्विड बेस, सीवरेज और माइनिंग से जुड़ी चीजें है। नदियां, झीलें है। शहर के वातावरण के लिए कार्ययोजना बनाकर उसको धरातल पर लाना। बाड़मेर डिस्ट्रिक्ट एनवायरमेंट प्लान बना हुआ है। संबंधित अधिकारीगण है। उनसे इस पर चर्चा की है। इसमें कितना प्रोग्रेस है। बाड़मेर में काम करने की जरूरत है। अभी इनकी सारी योजनाएं पाइप लाइन में है। सॉलिड बेस और लिक्विंड बेस के लिए इनको बहुत प्रयास करने की आवश्यकता है। कार्ययोजना को लागू करने के लिए अप्रूवल और बजट मिलने के लिए लागू करने की बेहद जरूरत है। इस हमने जोर दिया है। सांसद ने कई चीजों काे बताया है जिसका राज्य सरकार को बताएंगे न्यायमूर्ति अहमद ने कहा- माइनिंग पर जो भी कंडीशन होता है। जब खनन किया जाता है। पेड़ लगाने का 33 प्रतिशत उस पर कोई रियायत नहीं होनी चाहिए। जिसको माइनिंग दे रहे है उससे हरियाली विकसित करिए। शहर का ट्रैफिक का माहौल है। उस पुलिस को ध्यान देने और सबको ट्रेनिंग देने की जरूरत है। जगह-जगह हॉर्न बजाना और शोर गुल करना। गाड़ियां चालू रखने की जरूरत नहीं वहां पर चालू नहीं रखें। शहर में लागू में जागररूकता पैदा करना है। यह सबसे बड़ी बात है। सांसद बेनीवाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने हमें कई चीजों को बताया है। जिसको लेकर राज्य सरकार को बताएंगे। जिससे पर्यावरण के संतुलन को बनाए जा सकें। खेजड़ी का पर्यावरणीय महत्व ज्यादा खेजड़ी कटने को लेकर पूछे सवाल पर कहा कि इसको लेकर हमारे पास कोई बात नहीं आई है। खेजड़ी राज्य का वृक्ष है उसका पर्यावरणीय महत्व है। मैं यह चाहूंगा कि खेजड़ी पेड़ को हमेशा बचाया जाए। जहां विकास में बाधा आ रहा है। ऐसा होना चाहिए कि खेजड़ी के पूरे पेड़ या जंगल को नहीं काटा जाए। कम कम काटे जाए एक की जगह दस लगाए जाए। विकास ओर पर्यावरण दोनों साथ-साथ चल सकते है। अगर आप पर्यावरण को पहले रखेंगे तो विकास खत्म हो जाएगा। दोनों साथ में हो सकता है। आप चाइना को देख लिजिए बाड़मेर जैसा थार है वहां पर पूरे गोभी की हरियाली से भर दिया। ग्रीन बैल्ट निगरानी करने की जिम्मेदारी बोर्ड और डीएफओ की ग्रीन बेल्ट लगाने की बात कंपनियां करती है लेकिन होता नहीं है इस सवाल पर न्यायमूर्ति ने कहा- इसको लेकर हमारे पास सैकड़ों मामले आते है। इसको लेकर हमने बड़े कठिन आदेश पारित किए है। यह सुनियोजित किया है कि जो हमारे पॉल्यूशन बोर्ड, डीएफओ वो उसकी निगरानी करें। जो भी कंपनियां है उसके जो सीएसआर के पैसे है। पर्यावरण प्रबंधन, सामाजिक उत्थान और उसी इलाके में लगाए जाए। हमारे दर्जनों आदेश है, मैने जिला प्रशासन को बोला है कि वो उसमें कोशिश करेंगे। माइनिंग क्लोजर प्लान में सुधार करने की आवश्यकता है न्यायमूर्ति अहमद ने बताया- पूरे देश में बात हो रही है कि खनन का प्रबंधन होता है। माइनिंग क्लोजर प्लान होता है। माइनिंग करने के बाद उसको बंद करने के बाद लैंड का रिक्लेमेशन होता है। जहां हो सकता है। एनजीटी के आदेश से यह जरूरी हो गया है कि किसी भी माइनिंग बालू परियोजना के लिए सीटीओ (कंसल्ट टू ऑपरेट ) की जरूरत होती है। उसकी तमाम कंडीशन और जिम्मेदारी होती है। माइनिंग के लिए 25 प्रतिशत हो जाती है तब जाकर देखना और 50 प्रतिशत हो जाने पर भी देखना होता है। 75 प्रतिशत और 100 प्रतिशत पूरा हो जाने पर भी चैक करना होता है। मॉनिटरिंग करने वालों से जो भी भूल चुक हो उसमें सुधार करने की जरूरत है। जिससे माइनिंग भी हो भूमि का सुधार भी हो। जेएसडब्लू कोयला खनन से गंदा पानी किसानों के खेत सांसद ने JSW कंपनी की ओर से लिग्नाइट कोयला खनन के कारण फैल रहे प्रदूषण तथा खनन प्रक्रिया के दौरान निकाले जा रहे (डी-वॉटरिंग) गंदे पानी को किसानों के खेतों में छोड़े जाने से कृषि भूमि बंजर होती जा रही है। सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने किसानों के साथ प्रतिनिधि मंडल के साथ इस गंभीर प्रदूषण पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की। इसके साथ ही सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने जोधपुर, पाली एवं बालोतरा क्षेत्र की औद्योगिक फैक्ट्रियों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट जल के कारण लूणी नदी के प्रदूषित होने का गंभीर मुद्दा उठाया।

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