मुकंदरा टाइगर रिजर्व में एक साल से चल रहे थे प्रयास, टीम को अब मिली सफलता, अब तीनों टाइगर को लग गए रेडियो कॉलर

जंगल में बार-बार हो रहा था मूवमेंट: एमटी-5 का मूवमेंट जंगल के बाहर हो जाता था। हर महीने में ऐसी दिक्कत होती थी। पिछले दिनों भी ये भीलवाड़ा क्षेत्र में चला गया था। हालांकि, बाद में लौट आया था। ऐसे में यहां से बाहर जाने में काफी दिक्कत हो रही थी क्योंकि, बाघ का रेडियो कॉलर खराब था। मुकंदरा टाइगर रिजर्व के डीएफओ आरके खैरवा ने बताया कि खराब रेडियोकॉलर के कारण इसकी ट्रेकिंग नहीं कर पा रहे थे। जिस कारण वनकर्मियों को कई दिनों तक नजर भी नहीं आता था। इसको लगाए जाने के बाद इसकी अब मॉनिटरिंग हो सकेगी। टाइगर रिजर्व प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। डीएफओ मुथु एस ने बताया कि मुकंदरा में सभी बाघों को रेडियो कॉलर लगा दिए गए है। एमटी-6 और युवा बाघिन को पहले ही रेडियो कॉलर लगा चुके हैं। सिटी रिपोर्टर| कोटा मुकंदरा टाइगर रिजर्व में मंगलवार को एमटी-5 बाघ का खराब रेडियो कॉलर बदल दिया गया है। रेडियो कॉलर करीब एक साल से खराब चल रहा था। इसे बदलने के लिए पिछले काफी समय से बाघ को ट्रेकुंलाइज करने का प्रयास चल रहा था लेकिन इसकी ट्रेकिंग नहीं हो पा रही थी। मंगलवार सुबह मुकंदरा की टीम को इसमें सफलता हाथ लगी। इसके लिए रणथंभौर से वरिष्ठ चिकित्सक डॉ राजीव गर्ग को बुलाया गया था। मुकंदरा के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. तेजेंद्र रियाड के साथ मिलकर शाम 3.30 बजे यह रेडियो कॉलर बदला गया है। अब 24 घंटे वनकर्मियों द्वारा टाइगर की मॉनिटरिंग की जाएगी। सैटेलाइट से आ जाएगी इमेज- डॉ राजीव गर्ग, वरिष्ठ चिकित्सक सुबह ही मुकंदरा आ गए थे। यहां पर टाइगर को ट्रेकुंलाइज कर आधुनिक रेडियो कॉलर लगा दिया गया है। ये बैटरी से संचालित होता है। इसके मूवमेंट की जानकारी सैटेलाइट से मिलती रहेगी। मूवमेंट की इमेज मिलती रहेगी। यह पानी में भी खराब नहीं होगा। हालांकि, बैटरी की नियत मियाद है। ये बैटरी की लाइफ लाइन पूरी होने के बाद ही बंद होगा। पहले भी इसको लगाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन सफलता अब मिली है।

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