बच्चों में वैदिक संस्कारों का संवर्धन तथा वेद अध्ययन करवाने के लिए वेद स्वाध्याय पीठ गुरुकुल के तत्वावधान में शुक्रवार से 5 दिवसीय आवासीय शिविर का शुभारंभ हुआ। शिविर 30 दिसंबर तक चलेगा, इसमें विद्यार्थियों को दुर्गा सप्तशती पाठ की निरंतर चल रही कक्षाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने का प्रयास किया जाएगा। गुरुकुल में वर्षभर विद्यार्थियों को वेदाध्ययन तथा बालिकाओं को दुर्गा सप्तशती पाठ का नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है। इसी क्रम में इस विशेष शिविर के दौरान विद्यार्थियों द्वारा रुद्राष्टाध्यायी पाठ के माध्यम से भगवान शिव का अभिषेक किया जाएगा। वहीं, बालिकाओं द्वारा दुर्गा सप्तशती पाठ के साथ विधिवत हवन संपन्न करवाया जाएगा। शिविर की विशेषता यह रहेगी कि इसमें संस्कृत कॉलेज के वरिष्ठ प्रोफेसरों द्वारा विद्यार्थियों की परीक्षा भी करवाई जाएगी। परीक्षा में सफल छात्र-छात्राओं को प्रमाण-पत्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया जाएगा। वैदिक शिविर से जागा संस्कार और आत्मबल गुरुकुल के आचार्य योगेश पारीक ने बताया कि शिविर का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में वेदों के प्रति गहरी रुचि जागृत करना, बालिकाओं में दुर्गा सप्तशती पाठ के माध्यम से आत्मबल, संस्कार एवं साधना का विकास करना है। नई पीढ़ी को सनातन वैदिक परंपरा से जोड़ना है। गुरुकुल के महेश कुमार के अनुसार ऐसे शिविर विद्यार्थियों के बौद्धिक, आध्यात्मिक एवं नैतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा भारतीय वैदिक परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है। आधुनिक युग में जब संस्कारों का क्षरण हो रहा है, ऐसे शिविरों के माध्यम से विद्यार्थियों को अनुशासन, साधना, शुद्ध उच्चारण, वैदिक मर्यादा एवं आध्यात्मिक जीवन मूल्यों से परिचित करवाना अत्यंत आवश्यक है। यह आयोजन न केवल शैक्षणिक बल्कि आध्यात्मिक, नैतिक एवं सांस्कृतिक चेतना के विकास का भी सशक्त माध्यम है। { शिविर में 6 साल से 25 वर्ष के 60 विद्यार्थी वेद अध्ययन कर रहे हैं। { ब्रह्ममुहूर्त में उठकर नित्य पूजन, अर्चन, गायत्री मंत्र के पाठ करते हैं। { प्रात: काल पूजन, अर्चन करवाकर रुद्र पाठ का अभ्यास करते हैं। { दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक गृह शांति हवन, दुर्गासप्तशती के पाठ का उच्चारण करते हैं। { शाम को सामूहिक प्रसादी का आयोजन होता है ।


