लखनऊ KGMU के हॉस्टल से सुसाइड का प्रयास करने वाली रेजिडेंट डॉक्टर के कमरे से एक नोट मिला है। इसमें रेजिडेंट डॉक्टर ने लिखा- ‘मैं अपने माता-पिता के आकांक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही। मैं मरीजों के साथ भी जस्टिस नहीं कर पा रही। मैं अपनी लाइफ से संतुष्ट नही हूं। मुझे माफ कर देना..। घटना के बाद पुलिस ने कमरा नंबर-206 को सील कर दिया है। KGMU के मीडिया प्रभारी डॉ.केके सिंह का कहना है कि रेजिडेंट डॉक्टर अनस्टेबल मेंटल कंडीशन में थी। उसकी कंडीशन देख कर लग रहा था कि वह किसी कारण से तनाव में थी। ऐसे में उसने हीट ऑफ द मोमेंट के दौरान इतना बड़ा कदम उठा लिया। पुलिस इनवेस्टीगेशन कर रही है। जांच में सही बात सामने आ सकती है। सबसे पहले सफाई कर्मी ने देखा
सबसे पहले सफाईकर्मी ने गंभीर चोटिल अवस्था में रेजिडेंट डॉक्टर को नीचे पड़ा देखा। इसके बाद लोगों को सूचना दी। आनन-फानन में डॉक्टर को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती किया गया। परिजन कानपुर से ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। बेटी को देखकर माता-पिता रोने लगे। ट्रॉमा सेंटर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमिया अग्रवाल ने परिजनों को समझाया। रेजिडेंट डॉक्टर की हुई दोनों पैरों की सर्जरी KGMU ट्रॉमा सेंटर ने हेल्थ बुलिटेन जारी किया है। छात्रा की स्थिति स्थिर है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। बुधवार को ऑर्थोपेडिक सर्जन ने उसके दोनों पैरों की हड्डी की सफल सर्जरी की गई। सर्जरी 7:30 बजे पूरी हुई। सुबह तक लगातार मॉनिटर किया जाएगा। यदि सभी स्वास्थ्य मानक सामान्य रहे तो गुरुवार शाम तक वेंटिलेटर से हटाने का प्रयास किया जाएगा। कमरा दूसरी मंजिल पर, चौथी से लगाई छलांग
डॉ. प्रकृति का कमरा नम्बर-206, सेकेंड फ्लोर पर है। लेकिन सुसाइड करने के लिए उन्होंने चौथी मंजिल से छलांग लगाई थी। हालांकि, इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। न ही कोई सीसीटीवी सामने आया है। नोट में यह लिखा
जूनियर डॉक्टर के कमरे से पुलिस को एक नोट मिला है। जिसमें डॉक्टर ने लिखा है कि मैं जान देने जा रही हूं। इसका जिम्मेदार कोई नहीं है। मेरा अच्छा डॉक्टर बन पाना संभव नहीं हो पा रहा है। मुझे ये जगह पसंद है… यहां अच्छा लगता था। लेकिन धीरे-धीरे राह कठिन होती गई। डॉक्टर के साथियों ने बताया कि वह कुछ दिन से परेशान दिख रही थी। संभवतः पढ़ाई से भी संतुष्ट नहीं थी। आईसीयू में ड्यूटी के दौरान मरीजों की मौत होने से वह दुखी हो जाती थी। रेजिडेंट हॉस्टल में 100 कमरे
KGMU के इस रेजिडेंट डॉक्टर हॉस्टल की G+4 बिल्डिंग में हर फ्लोर पर 20 कमरे हैं। इस हिसाब से कुल 100 कमरे हैं। हर कमरा डबल ऑक्यूपेंसी का है। यानी हर कमरे में 2 रेजिडेंट डॉक्टरों के ठहरने की सुविधा है। ऐसे में अचानक हुई इस घटना से यहां रहने वाले सभी डॉक्टर सकते में हैं। रेजिडेंट डॉक्टरों ने उठाया काम के दबाव का मुद्दा
KGMU रेजिडेंट डॉक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने रेजिडेंट डॉक्टरों के ऊपर काम के दबाव का मुद्दा उठाया। जूनियर डॉक्टर द्वारा आत्महत्या का प्रयास करने के मामले को एसोसिएशन ने आंख खोलने वाला बताया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. दिव्यांश सिंह के मुताबिक, केजीएमयू प्रशासन को रेजिडेंट के ड्यूटी घंटों के साथ ही तनाव पर भी प्रबंधन को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने इस मामले में केजीएमयू प्रशासन को विशेष बैठक बुलाने के लिए कहा है। KGMU में पहले भी हुईं ऐसी घटनाएं
यूपी के सबसे बड़े इस चिकित्सा विश्वविद्यालय में पहले भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। इससे पहले नवंबर 2023 में MBBS फर्स्ट ईयर की छात्रा शिल्पी ने हॉस्टल में फंदे लटककर जान दे दी थी। अचानक हुई इस घटना ने भी कई सवाल खड़े किए थे।
…………………………… रेजिडेंट डॉक्टर से जुड़ी यह मूल खबर भी पढ़ें..
लखनऊ में KGMU की डॉक्टर हॉस्टल से कूदी:10 दिन पहले जॉइन किया था; पुलिस बोली- नौकरी के प्रेशर में सुसाइड का प्रयास घटना सुबह साढ़े 9 बजे की है। रेजिडेंट डॉक्टर प्रकृति वासवानी कानपुर की रहने वाली है। वह मेडिसिन की जूनियर रेजिडेंट है। अभी 10 दिन पहले ही यहां जॉइन किया था। प्रकृति गर्ल्स हॉस्टल में कमरा नंबर-206 में रहती है। ब्लड लॉस की वजह से हालत गंभीर है। दोनों कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्चर के साथ ही पैर में भी फ्रैक्चर है। पूरी खबर पढ़ें…


