बीकानेर के महानंद महादेव मंदिर में बुधवार को सुबह से मंत्रोचार का सिलसिला शुरू हो गया। मंदिर के एक तरफ बनी यज्ञ शाला में 41 किशोर और युवाओं का यज्ञोपवित संस्कार किया गया। आमतौर पर एक विवाह जितना खर्च इस संस्कार पर होता है लेकिन यहां बिना खर्च ही यज्ञोपवित संस्कार हो गया। पुष्करणा समाज से जुड़े कई परिवारों ने सामूहिक यज्ञोपवित संस्कार में हिस्सा लिया। आमतौर पर पुष्करणा समाज को सामूहिक सावा विख्यात है लेकिन इन दिनों सामूहिक यज्ञोपवित संस्कार के प्रति भी रुचि बढ़ गई है। महानंद महादेव मंदिर में आज से पच्चीस साल पहले ये सिलसिला शुरू हुआ था। तब इक्का-दुक्का लोग ही यहां सामूहिक यज्ञोपवित संस्कार में रुचि लेते थे लेकिन अब ये सिलसिला बढ़ गया है। बुधवार को ये संख्या बढ़कर 41 हो गई। एक ही परिसर में 41 यज्ञ वेदी लगाई गई। जहां बटुक (जिसका यज्ञोपवित संस्कार होना है) के सामने उसके माता-पिता या फिर दादा-दादी ने बैठे। बीकानेर के विद्वान प्रकांड पंडित नथमल पुरोहित के सानिध्य में सभी को यज्ञोपवित करवाया गया। विधि विधान के साथ करीब दो घंटे तक मंत्रोचार का सिलसिला चलता रहा। यज्ञशाला में सिर्फ विधि विधान के मुताबिक वस्त्र धारण करने वालों को ही प्रवेश दिया गया। फिजूलखर्ची रोकने की कोशिश दरअसल, बीकानेर के पुष्करणा समाज में यज्ञोपवित संस्कार पर भी विवाह जितना ही खर्च करने की परम्परा चल पड़ी है। ऐसे में मायरा, देराळी सहित अनेक खर्चों पर रोक लगाते हुए सामूहिक यज्ञोपवित संस्कार करवाया जा रहा है। ऐसे में मध्यम वर्गीय परिवार फिजूलखर्ची से बच रहे हैं।


